आगरा। जौनपुर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में करीब पांच करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में आरोपपत्र का सामना कर रहे राकेश सिंह को आगरा का बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) नियुक्त किए जाने के बाद शिक्षा विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
प्रदेश के महत्वपूर्ण जनपदों में शामिल आगरा में उनकी तैनाती को लेकर विभागीय हलकों और शिक्षक संगठनों के बीच सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जौनपुर डायट में वर्ष 2022 से 2024 के बीच विभिन्न मदों में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बाद तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य एवं वर्तमान में बीएसए रहे राकेश सिंह के खिलाफ आरोपपत्र जारी किया गया था।
बताया गया कि राज्यपाल की मंजूरी के बाद शासन स्तर से विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की गई।जांच में परीक्षा व्यय, काउंसलिंग शुल्क, सामग्री क्रय, प्रशिक्षण भुगतान, वाहन व्यय तथा अन्य वित्तीय मदों में अनियमितताओं के आरोप दर्ज किए गए हैं।
आरोप पत्र में छह प्रमुख मामलों का उल्लेख किया गया है। इनमें डीएलएड परीक्षा व्यय से संबंधित धनराशि का कथित रूप से अन्य मदों में उपयोग, काउंसलिंग शुल्क के भुगतान में अनियमितता, बिना विधिवत प्रक्रिया के सामग्री खरीद, विभिन्न भुगतानों में नियमों की अनदेखी तथा वाहन संचालन से जुड़े खर्चों में गड़बड़ी जैसे आरोप शामिल हैं।
मामले की जांच आजमगढ़ मंडल के तत्कालीन संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर पर कराई गई थी।इसके बाद शासन द्वारा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वाराणसी मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. दिनेश सिंह को नामित किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
इधर, ऐसे समय में जब आरोपपत्र पर कार्रवाई की प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई है, आगरा जैसे बड़े जिले में बीएसए पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि जब किसी अधिकारी के विरुद्ध गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की विभागीय जांच लंबित हो, तब महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व दिए जाने के औचित्य पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
हालांकि, शासन स्तर पर नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। वहीं विभागीय नियमों के तहत आरोपपत्र जारी होने के बाद भी अंतिम निर्णय होने तक अधिकारी सेवा में बने रह सकते हैं। समाचार लिखे जाने तक राकेश सिंह का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था।
यह मामला अब आगरा में उनकी नई तैनाती के बाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है और शिक्षा विभाग की पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है।





















