आगरा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की रिपोर्ट की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजमहल पर सल्फर का हमला हो रहा है। रिपोर्ट में मथुरा रिफाइनरी और फिरोजाबाद के कांच उद्योगों को इस जहरीली हवा का प्रमुख स्रोत बताया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप को यह रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि मथुरा और फिरोजाबाद की हवा में सल्फर डाई ऑक्साइड और भरतपुर में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड का स्तर निर्धारित वार्षिक मानकों को पार कर गया है।
मंडलायुक्त ने इस रिपोर्ट को गम्भीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अमित मिश्रा को निर्देश दिए हैं कि हर महीने की 10 तारीख तक वायु गुणवत्ता के आंकड़े अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं।
रिपोर्ट में फरवरी से मई 2025 तक के मॉनिटरिंग डाटा का जिक्र है। सल्फर का निर्धारित वार्षिक मानक 20.0 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। लेकिन मथुरा में 19.7 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से खतरनाक उछाल लेते हुए मई में 25.06 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर पहुंच गया।
फिरोजाबाद की स्थिति और अधिक खराब रही, जहां मार्च 2025 में सल्फर का स्तर 32.8 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। टीटीजेड अंतर्गत आने वाले भरतपुर जिले में फरवरी 2025 में नाइट्रोजन गैस का स्तर भी अपने मानक 30.0 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से आगे निकल कर 32.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर पहुंच गया।
माना जा रहा है कि औद्योगिक उत्सर्जन पर लगाम न होने के कारण ऐसा हो रहा है। रिपोर्ट में इस वृद्धि के लिए मथुरा रिफाइनरी, फिरोजाबाद का ग्लास उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियों में प्रयुक्त होने वाले डीजल जनरेटर सेट जिम्मेदार माने गए हैं। राजमार्गों पर बढ़ते भारी और बाहरी डीजल वाहनों ने नाइट्रोजन ऑक्साइड का ग्राफ बढ़ा दिया है।
मंडलायुक्त नागेंद्र प्रताप ने इस संबंध में विभागों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मानक से अधिक प्रदूषण मिलने पर संबंधित अधिकारियों से सीधे स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा।





















