संसद में भाजपा को बड़ा झटका: 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा, महिला आरक्षण पर अटका मामला
नई दिल्ली। संसद में शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब केंद्र सरकार द्वारा लाया गया संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 लोकसभा में पास नहीं हो सका। यह बिल महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों के पुनर्गठन (डिलिमिटेशन) से जुड़ा हुआ था।
मतदान के दौरान बिल को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया। बिल के पक्ष में लगभग 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया, जिसके चलते यह प्रस्ताव गिर गया।
इस बिल के गिरने के बाद सरकार ने इससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विधेयक—जैसे डिलिमिटेशन बिल 2026—को भी आगे नहीं बढ़ाया।
यह पिछले कई वर्षों में पहली बार है जब केंद्र सरकार का कोई बड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया।
📘 क्या था 131वां संविधान संशोधन बिल? (पूरी जानकारी)
🔹 1. मुख्य उद्देश्य
महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण देना
लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक करना
🔹 2. डिलिमिटेशन से जुड़ा मामला
देश में सीटों का नया बंटवारा (Delimitation) करना
2011 जनगणना या नई जनगणना के आधार पर सीटें तय करना
महिलाओं के लिए सीटें इसी प्रक्रिया के बाद लागू करना
🔹 3. संविधान में बदलाव
अनुच्छेद 82 और 334A में संशोधन का प्रस्ताव
जनगणना का इंतजार किए बिना डिलिमिटेशन करने की कोशिश
⚠️ विवाद क्यों हुआ?
🔸 विपक्ष का आरोप
सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है
दक्षिण और छोटे राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं
जनगणना के बिना डिलिमिटेशन करना गलत
🔸 सरकार का पक्ष
महिलाओं को जल्द से जल्द राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना
2029 चुनाव तक आरक्षण लागू करना
📊 क्या महिला आरक्षण बिल खत्म हो गया?
❌ नहीं
2023 का महिला आरक्षण कानून (106वां संशोधन) अभी भी लागू है
लेकिन उसका लागू होना जनगणना और डिलिमिटेशन पर निर्भर है
👉 यानी 131वां संशोधन सिर्फ प्रक्रिया को तेज करने के लिए था, जो पास नहीं हो पाया।
131वां संविधान संशोधन बिल गिरना सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है
महिला आरक्षण का मुद्दा अभी भी जिंदा है, लेकिन लागू होने में देरी हो सकती है
आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है
- होम
- UP Board Result 2025
- देश
- विदेश
- प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- अमरोहा
- अमेठी
- अम्बेडकर नगर
- अयोध्या (पूर्व नाम: फैजाबाद)
- अलीगढ़
- आगरा
- आजमगढ़
- इटावा
- उन्नाव
- एटा
- औरैया
- कन्नौज
- कानपुर देहात
- कानपुर नगर
- कासगंज
- कुशीनगर
- कौशांबी
- गाज़ियाबाद
- गाज़ीपुर
- गोरखपुर
- गौतम बुद्ध नगर (नोएडा)
- चंदौली
- चित्रकूट
- गोंडा
- जालौन
- जौनपुर
- बदायूं
- जगत
- प्रयागराज (पूर्व नाम: इलाहाबाद)
- झांसी
- फतेहपुर
- देवरिया
- त्रिपुरा
- पीलीभीत
- प्रतापगढ़
- बरेली
- फर्रुखाबाद
- बहराइच
- फिरोजाबाद
- बलरामपुर
- बलिया
- बांदा
- बाराबंकी
- बस्ती
- बिजनौर
- बुलंदशहर
- महामाया नगर
- महोबा
- मथुरा
- मऊ
- मिर्जापुर
- मुरादाबाद
- मुज़फ्फरनगर
- मिजोरम
- रामपुर
- महाराजगंज
- लखीमपुर खीरी
- मैनपुरी
- मेरठ
- रायबरेली
- लखनऊ
- ललितपुर
- वाराणसी
- शामली
- शाहजहांपुर
- संत कबीर नगर
- संत रविदास नगर (भदोही)
- सम्भल
- सहारनपुर
- सिद्धार्थनगर
- हापुड़
- सीतापुर
- सुल्तानपुर
- सोनभद्र
- श्रावस्ती
- हमीरपुर
- हाथरस
- हरदोई
- अरुणाचल प्रदेश
- असम
- आंध्र प्रदेश
- उत्तराखंड
- ओडिशा
- कर्नाटक
- केरल
- गुजरात
- गोवा
- छत्तीसगढ़
- तमिलनाडु
- तेलंगाना
- नगालैंड
- झारखंड
- पंजाब
- पश्चिम बंगाल
- बिहार
- हरियाणा
- महाराष्ट्र
- मध्य प्रदेश
- हिमाचल प्रदेश
- राजस्थान
- सिक्किम
- मेघालय
- मणिपुर
- उत्तर प्रदेश
- विविध
- खेल जगत
- मनोरंजन
- धर्म – आस्था
- संपादकीय
- ट्रेंडिंग
- ई-पेपर
बड़ी खबर: संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल गिरा
Rahul Gaur 📍 Mathura
राहुल गौड एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा में सक्रिय रहते हुए उन्होंने विभिन्न समाचार माध्यमों के लिए निष्पक्ष और प्रभावशाली रिपोर्टिंग की है। उनके कार्य में स्थानीय मुद्दों की गंभीर समझ और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता की झलक मिलती है।























