मथुरा/वृंदावन। ब्रज की परंपरागत भावसेवा के अंतर्गत इस वर्ष फूल बंगला उत्सव विशेष भव्यता के साथ मनाया जाएगा। ऐतिहासिक परंपरा के अनुसार जहां मंदिरों में 1 दिन से लेकर 108 दिनों तक फूल बंगले सजाए जाते हैं, वहीं इस बार प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में 108 के स्थान पर 138 दिन तक फूल बंगले सजाए जाएंगे।
इतिहास और परंपरा-
इतिहासकार प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, विक्रम संवत 1600 के आसपास स्वामी हरिदास, बल्लभाचार्य तथा विठ्ठलनाथ के प्रयासों से ब्रज के मंदिरों में फूल बंगला एवं श्रृंगार कला का विकास हुआ।इस परंपरा को आगे बढ़ाने में वृंदावन के हरिदास बिहारी घराना, राधावल्लभ घराना और गोपेश्वर घराना का विशेष योगदान रहा।
इन घरानों के कलाकारों—
लक्ष्मीनारायण, ब्रजबल्लभ, छबीलेबल्लभ, ललितबल्लभ, शरण बिहारी, शिवचरण, गिर्राज प्रसाद, गिरधारी लाल और नत्थीलाल—की कला आज भी श्रद्धा से याद की जाती है। विशेष रूप से श्रीहरिदासीय संप्रदाय के 14वें आचार्य ब्रजबल्लभ महाराज को बंगला कला का सर्वगुण सम्पन्न कलाकार माना जाता है।
कला और निर्माण की विशेषता-
फूल बंगला निर्माण एक जटिल और सूक्ष्म कला है, जिसमें शीशम व सागवान की लगभग 100 टटियाओं (फ्रेम) का उपयोग होता है। इन पर मोतिया, मोगरा, गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा आदि फूलों की लड़ियों से चौमासी, छैमासी और बारहमासी सजावट की जाती है।इनमें कमल, अष्टकमल, स्वास्तिक और ‘श्री’ जैसे आकर्षक जाल बनाए जाते हैं, जिनकी विशेषता यह होती है कि उनके प्रारंभ और अंत का पता लगाना कठिन होता है।इसके अलावा बिछैयाओं में केले के पत्तों से मढ़ाई कर कृष्ण लीलाओं—माखन चोरी, कालिया मर्दन, गोवर्धन लीला, महारास आदि—के जीवंत दृश्य उकेरे जाते हैं।
आधुनिक स्वरूप और बढ़ती भव्यता-
पहले फूल बंगला केवल फूल, केला, कपड़ा और कागज से सजाए जाते थे, लेकिन अब इनमें मिठाई, फल, मेवा, चांदी के सिक्के और नोटों का भी प्रयोग होने लगा है।बड़े बंगले के लिए फूल दिल्ली, अहमदाबाद और बैंगलोर जैसी दूरस्थ मंडियों से मंगवाए जाते हैं। बंगला सेवा के लिए भक्तों को कई महीनों पहले से बुकिंग करानी पड़ती है।
29 मार्च से शुरू होगा उत्सव-
हर वर्ष चैत्र शुक्ल एकादशी से हरियाली अमावस्या तक चलने वाली इस सेवा के तहत इस बार 29 मार्च से फूल बंगला उत्सव शुरू होगा। पुरुषोत्तम मास के कारण इस बार अवधि बढ़ाई गई है।मंदिर में सुबह और शाम दोनों समय बंगले सजाए जाएंगे, जिससे कुल संख्या लगभग 275 फूल बंगलों तक पहुंचने की संभावना है।
सेवा शुल्क में भारी बढ़ोतरी-
बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला सेवा के लिए पहले 15 हजार रुपये जमा कराने होते थे, लेकिन इस बार हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी ने इसे बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दिया है।इस प्रकार प्रतिदिन लगभग 3 लाख रुपये मंदिर कोष में जमा होंगे। इस संबंध में मंदिर प्रशासन द्वारा सूचना भी जारी कर दी गई है।
भक्तों के लिए अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव-
फूल बंगला उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में फूलों, इत्र और गुलाब जल की सुगंध वातावरण को भक्तिमय बना देती है। ठाकुरजी के फूल बंगले में दर्शन कर श्रद्धालु आध्यात्मिक आनंद से सराबोर हो उठते हैं।
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ब्रज में सजेगा भव्य फूल बंगला उत्सव, इस बार बांके बिहारी मंदिर में 138 दिन होंगे दर्शन
Rahul Gaur 📍 Mathura
राहुल गौड एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा में सक्रिय रहते हुए उन्होंने विभिन्न समाचार माध्यमों के लिए निष्पक्ष और प्रभावशाली रिपोर्टिंग की है। उनके कार्य में स्थानीय मुद्दों की गंभीर समझ और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता की झलक मिलती है।























