अलीगढ़। इगलास तहसील परिसर, जहां प्रतिदिन सैकड़ों फरियादी न्याय और अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए पहुंचते हैं, आज भी अपनी बदहालती को रो रहा है आज भी फरियादी वर्षों पुरानी कच्ची रास्ते जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। हर बारिश के बाद तहसील परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है और अधिवक्ताओं, फरियादियों, बुजुर्गों, महिलाओं व दिव्यांगों को घुटनों तक कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी तहसील परिसर में उपजिलाधिकारी (एसडीएम), तहसीलदार और क्षेत्राधिकारी (सीओ) के सरकारी आवास भी स्थित हैं। इसके बावजूद वर्षों से चली आ रही इस समस्या का समाधान नहीं हो सका है, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि कई बार जलभराव के कारण फिसलन से हादसे होने की नौबत आ जाती है। रोजाना सैकड़ों लोग अपने प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज, भूमि विवाद और अन्य जरूरी कार्यों के लिए तहसील पहुंचते हैं, लेकिन उनका स्वागत टूटी सड़क, कीचड़ और जलभराव से होता है।
बार एसोसिएशन पर भी उठ रहे सवाल
तहसील की इस बदहाल स्थिति को लेकर अब बार एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बार एसोसिएशन के अध्यक्ष का चुनाव होता है, लेकिन वर्षों से अधिवक्ताओं और फरियादियों के लिए एक पक्का रास्ता तक नहीं बन पाया।
लोग सवाल कर रहे हैं कि यदि बार एसोसिएशन अपने ही साथियों और न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले फरियादियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की मांग को प्रभावी ढंग से नहीं उठा पा रही है, तो फिर हर वर्ष होने वाले चुनावों का उद्देश्य क्या है? अधिवक्ताओं का मानना है कि बार एसोसिएशन को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर प्रशासन से स्थायी समाधान सुनिश्चित कराना चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतें कई बार की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अब लोगों की मांग है कि तहसील परिसर में तत्काल जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कराई जाए और कच्चे रास्ते को पक्का बनाया जाए, ताकि अधिवक्ताओं और आम जनता को इस बदहाली से निजात मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इगलास तहसील की यह तस्वीर बदलेगी, या फिर हर बरसात में अधिवक्ता और फरियादी इसी तरह कीचड़ और जलभराव से जूझते रहेंगे?





















