दैनिक जिला नजर संवाददाता
फतेहाबाद/आगरा। कस्बा स्थित जनता इंटर कॉलेज के समीप आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक संत लोकेशानंद जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया।
महारास प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि महारास केवल नृत्य नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य प्रतीक है। यह प्रेम, समर्पण और निष्काम भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है।
उन्होंने कहा कि वृंदावन की गोपियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम सांसारिक नहीं, बल्कि पूर्णतः आध्यात्मिक था। महारास के माध्यम से भगवान ने यह संदेश दिया कि जो भक्त तन, मन और हृदय से ईश्वर को समर्पित हो जाता है, उसे प्रभु की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। महाराज ने कहा कि भक्ति में अहंकार, स्वार्थ और दिखावे का कोई स्थान नहीं होता।
कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, कालिया नाग दमन, कंस वध, गुरु संदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने तथा माता देवकी और वसुदेव को कारागार से मुक्ति दिलाने के प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल राधे-राधे तथा जय श्रीकृष्ण के जयघोषों से गूंज उठा।
कथा के समापन पर सुभाष पैगोरिया, संजीव पैगोरिया और विनोद पैगोरिया अध्यक्ष प्रतिनिधि रवि प्रकाश शल्या ने श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी। इसके बाद श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लेकर भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना की।





















