आयोग, सरकार और न्यायालय के बीच में अटका,पंचायत चुनाव
रिपोर्ट- देव बक्श वर्मा
अयोध्या। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अब तय समय में होना संभव नहीं लग रहा है। एक तरफ कहां जनता के बीच प्रधानी का चुनाव लड़ने वाले, क्षेत्र पंचायत का चुनाव लड़ने वाले, जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने वाले और उसके बाद ब्लॉक प्रमुख व जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाले चुनाव की तारीख घोषित करने का इंतजार कर रहे हैं।
संभावित प्रत्याशी धन भी खर्च कर रहे हैं, मेहनत भी भी कर रहे हैं, किंतु निराशा उनके हाथ अभी तक लगी है। उनके सामने चुनाव प्रचार का सबसे बड़ा संकट, आरक्षण का है। कौन सा क्षेत्र आरक्षित हो जाए यह पता नहीं है। मेहनत करने के बाद यदि उस क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। फिर भी लोग होल्डिंग और जनता के बीच अपनी फाइट बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
यूपी पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का प्रकाशन 22 अप्रैल को होना था, लेकिन अब इसे 10 जून तक टाल दिया गया है। इससे समय पर चुनाव कराने की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है। ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत चुनाव और जिला पंचायत चुनाव होने हैं, लेकिन इसमें कई बाधाएं हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव की फाइनल वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। बताया गया कि इससे पहले भी 4 बार पंचायत चुनाव की मतदाता सूची की तारीख आगे बढ़ाई जा चुकी है।
चुनाव आयोग के अनुसार 28 मई 2026 तक वोटर लिस्ट के कंप्यूटरीकरण और दोहराव वाले नामों को हटाने का कार्य किया जाएगा। फिर मतदाता सूची बीएलओ और अन्य कर्मी।
9 जून तक मतदान स्थलों की मैपिंग, वार्डों की नंबरिंग और जरूरी दस्तावेजों फोटो कॉपी तैयार करने का कार्य पूरा करें। पंचायत चुनाव की अंतिम सूची 10 जून को प्रकाशित होगी। जैसा की पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का सबसे पहले 15 जनवरी को जारी होने वाली थी, लेकिन ये काम छह महीने तक टलता चला गया है।
फरवरी, मार्च के बाद 22 अप्रैल को वोटर लिस्ट आने का सभी उम्मीदवार और दावेदार बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब 5वीं बार विस्तार दे दिया गया है।
सरकार अपनी बात कर रही है, चुनाव आयोग अपनी बात कर रही है, न्यायालय कुछ और कह रहा है, जनता की मनसा कुछ और कह रही है। ऐसे में चुनाव अब निर्धारित समय पर हो पाना संभव नहीं लग रहा है, ना ही कोई गाइडलाइन स्पष्ट आ रही है।
पंचायत चुनाव मंत्री निर्धारित समय पर चुनाव कराने की बात बार-बार कर रहे थे उनका यह दवा आप पूरी तरह से खोखला लग रहा है। यदि समय पर चुनाव नहीं होंगे तो क्या कार्यकाल बढ़ाया जाएगा या प्रशासक नियुक्त होंगे।























