आगरा। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने यहां अपने खिलाफ स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए अदालत में चल रहे मुकदमे में वादी को अनुचित लाभ दिए जाने के आरोप लगाए हैं।
वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट ने ही यह जानकारी दी।उन्होंने बताया कि कंगना रनौत की अधिवक्ता सुधा प्रधान ने अधिवक्ता अनुसुइया चौधरी की ओर से मंगलवार को कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया कि उक्त प्रकरण में न्यायालय द्वारा 16 अप्रैल, 26 की तिथि आदेश हेतु नियत की गई थी, किंतु उक्त तिथि पर निर्णय पारित नहीं किया गया।
उक्त अवसर पर न्यायालय द्वारा शिकायतकर्ता अर्थात वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी एक्ट) के संबंध में बहस करने की अनुमति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता को फाइल को मार्क करने का अवसर भी प्रदान किया गया, जो कि वादी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण लाभ है।
उक्त प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि रिवीजन न्यायालय ने अपने आदेश में 29-11-2025 को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया था कि वर्तमान प्रकरण का निस्तारण केवल अभिलेख पर उपलब्ध तथ्य एवं साक्ष्य के आधार पर किया जाए।
इसके विपरीत शिकायतकर्ता द्वारा 3 अप्रैल, 26 को कुछ अतिरिक्त दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए गए, जो पूर्व में अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य का हिस्सा नहीं थे तथा उन्हें अभिलेख पर लिए जाने की अनुमति प्रदान कर दी गई।
उक्त नए दस्तावेजों के संबंध में अभियुक्ता को अपना विस्तृत प्रति उत्तर प्रस्तुत करने हेतु समुचित अवसर दिया जाना न्याय हित में अत्यंत आवश्यक है ताकि दोनों पक्षों को पूर्ण एवं निष्पक्ष सुनवाई का अवसर प्रदान हो सके तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित हो सके।
प्रार्थना पत्र में यह भी निवेदन किया गया कि 30 अप्रैल, 26 को कोई आदेश पारित न किया जाए तथा अभियुक्ता को उक्त प्रयोजन हेतु पर्याप्त समय प्रदान किया जाए।
इस अवसर पर वादी राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने उक्त प्रार्थना पत्र का तीव्र विरोध करते हुए कहा कि यह न्यायालय का सरासर अपमान है तथा न्यायालय पर झूठे और गंभीर आरोप लगाए गए हैं, 16 अप्रैल, 2026 को इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी इनफॉरमेशन एक्ट पर कोई भी बहस नहीं हुई थी और न ही कोई रिमार्क किया गया था। सिर्फ कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर फ्लैग लगाए गए थे, ताकि कोर्ट को निर्णय पारित करते समय उक्त उक्त प्रपत्रों एवं साक्ष्य को पढ़ने में सुविधा हो सके।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विपक्षी के प्रार्थना पत्र पर 30 अप्रैल, 2026 को ही कोई आदेश पारित करने के आदेश किए हैं।























