अलीगढ़। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अलीगढ़ जनपद तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत जिले में अब तक 54,576 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जबकि चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक 32,168 और महिलाओं को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।यह जानकारी विकास भवन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में दी गई, जिसकी अध्यक्षता अविनाश कुमार ने की। बैठक में लखपति दीदी अभियान, कुटुंबश्री योजना और पात्र गृहस्थी परिवारों को महिला स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने की प्रगति की समीक्षा की गई।बैठक में योगेंद्र कुमार ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक पात्र परिवारों और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार और आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।मंजू त्रिवेदी ने बताया कि जिले में मई 2026 तक 1,25,928 पात्र गृहस्थी परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके सापेक्ष अब तक 59,730 परिवारों को समूहों से जोड़ा जा चुका है। वहीं जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत 16,622 परिवारों को भी आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है।बैठक में कुटुंबश्री योजना की भी समीक्षा की गई। महिलाओं को रोजगार एवं आय के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए जनपद में 11 नई कुटुंबश्री कैंटीनों की स्थापना का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इन कैंटीनों के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।सीडीओ योगेंद्र कुमार ने ब्लॉक स्तर पर वर्षभर में 25 हजार पात्र गृहस्थी परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए अधिकारियों को अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने समूह सखी, विद्युत सखी, रोजगार सेवक और ग्राम सचिवों के माध्यम से अधिकाधिक महिलाओं को समूहों से जोड़ने पर जोर दिया।बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कृषि के साथ-साथ गैर-कृषि गतिविधियों में कार्यरत महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की योजनाओं से भी पात्र परिवारों को लाभान्वित करने की रणनीति पर चर्चा की गई।अधिकारियों का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। जिले में चल रहे अभियान से हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है
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