🔹फसल बचाने के लिए बुलाए गए थे शिकारी? निर्माणाधीन मकान में कैसे पहुंची बंदूक, किसके आदेश पर चल रहा था ‘शिकार’ का खेल—पुलिस की मौजूदगी में भी रहस्य बरकरार
पिनाहट/आगरा। बसई अरेला थाना क्षेत्र में एक बंदूक ने ऐसा कहर बरपाया कि हंसी-खुशी ट्यूशन पढ़ने गया कक्षा 12 का छात्र जिंदगी की जंग हार गया। निर्माणाधीन मकान में रखी बंदूक को कौतूहलवश देखने के दौरान अचानक हुए फायर में गंभीर रूप से घायल हुए मोहित पुत्र विनोद प्रजापति की इलाज के दौरान मौत हो गई। छात्र की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा है, वहीं गांव में इस घटना को लेकर कई तरह के सवाल तैर रहे हैं।
फसल की रखवाली या बंदूक का खेल?
सूत्रों और ग्रामीणों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक गांव में नीलगाय और जंगली सुअरों से फसल बचाने के लिए कुछ शिकारियों को बुलाया गया था। ग्रामीणों का दावा है कि इन्हीं शिकारियों की बंदूक निर्माणाधीन मकान के अंदर रखी गई थी। इसी मकान में आकाश द्वारा कक्षा 12 के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया जाता था।
शनिवार शाम ट्यूशन के दौरान बच्चों की नजर बंदूक पर पड़ी। पुलिस के मुताबिक बच्चे बंदूक को देखने लगे और इसी दौरान अचानक फायर हो गया। बंदूक से निकले छर्रे मोहित की बाईं जांघ में जा लगे। आनन-फानन में परिजन उसे आगरा के निजी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
अब हादसे से ज्यादा ‘आदेश’ पर सवाल
मोहित की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जंगली जानवरों को मारने के लिए शिकारी किसके कहने पर बुलाए गए थे? क्या उनके पास शिकार के लिए वैध अनुमति थी? बंदूक किसकी थी? निर्माणाधीन मकान में हथियार रखने की अनुमति किसने दी? और सबसे अहम—बच्चों की मौजूदगी वाले स्थान पर हथियार लापरवाही से कैसे छोड़ दिया गया?
ग्रामीणों में चर्चा है कि यदि फसल सुरक्षा के लिए वास्तव में शिकारी बुलाए गए थे तो इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसकी थी। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
एसीपी पहुंचे, लेकिन सवालों का जवाब नहीं मिला
गोली चलने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। एसीपी पिनाहट भी पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मौके की स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने घटनास्थल की जांच की है। हालांकि, घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों और शिकारियों को बुलाए जाने तथा जंगली जानवरों को मारने की अनुमति के संबंध में जानकारी मांगने पर स्पष्ट जानकारी देने से इनकार किया गया।
पुलिस का कहना है कि अभी कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। प्रार्थना पत्र मिलने के बाद नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
मौत के बाद अब जांच पर टिकी निगाहें
एक नाबालिग छात्र की मौत ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब सवाल सिर्फ अचानक हुए फायर का नहीं, बल्कि हथियार वहां तक कैसे पहुंचा और उसे वहां रखने की जिम्मेदारी किसकी थी, इसका भी है। ग्रामीणों और मृतक के परिजनों की नजर अब पुलिस जांच पर है। अगर शिकारियों को बुलाने और हथियार रखने से जुड़े नियमों की अनदेखी हुई है, तो जांच में इसकी जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है।





















