तीन राज्यों से होकर गुजरती है आस्था की यह ऐतिहासिक यात्रा, गिर्राज परिक्रमा में भी उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब
मथुरा। उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा में अधिक मास आरंभ होते ही विश्व प्रसिद्ध ब्रज 84 कोस परिक्रमा का शुभारंभ हो गया है। यह परिक्रमा 17 मई से 16 जून तक लगाई जायेगी।सनातन धर्म में ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली ब्रज मंडल की परिक्रमा लगाकर आध्यात्मिक पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में की गई ब्रज परिक्रमा विशेष फलदायी मानी जाती है। यही कारण है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रशासनिक और धार्मिक सूत्रों के अनुसार वर्ष 2026 में करीब एक करोड़ श्रद्धालुओं के ब्रज 84 कोस परिक्रमा में शामिल होने की संभावना है। वहीं गिर्राज महाराज की परिक्रमा में 5 से 6 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।विगत वर्ष 2023 में लगभग 60 लाख श्रद्धालुओं ने ब्रज 84 कोस परिक्रमा लगाकर पुण्य लाभ कमाया था। हालांकि उस समय बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और हरियाणा के नूंह-मेवात में धार्मिक आस्था से जुड़े घटनाक्रमों के कारण श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम देखने को मिली थी। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई।
ब्रज 84 कोस परिक्रमा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तीन राज्यों— उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा से होकर गुजरती है। परिक्रमा मार्ग में उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, गोकुल, बलदेव, महावन सहित अधिकांश ब्रज क्षेत्र शामिल हैं। राजस्थान के डीग, कामां और भरतपुर क्षेत्र भी इस पवित्र यात्रा का हिस्सा हैं, जबकि हरियाणा के पलवल एवं उससे जुड़े सीमांत क्षेत्र परिक्रमा मार्ग में आते हैं। अलीगढ़ जनपद के कुछ भाग भी ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक सीमा में सम्मिलित माने जाते हैं।धार्मिक विद्वानों के अनुसार “84 कोस” का अर्थ लगभग 252 किलोमीटर की परिक्रमा से है। यह यात्रा भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं रास लीलाओं से जुड़े प्रमुख स्थलों का भ्रमण कराई जाती है। श्रद्धालु इस दौरान गिर्राज महाराज की सप्तकोसी परिक्रमा भी लगाते हैं, जिसे ब्रज यात्रा का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।मान्यता है कि ब्रज 84 कोस परिक्रमा करने से मनुष्य को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अधिक मास में इस परिक्रमा का महत्व और भी बढ़ जाता है, जिसके चलते इस बार ब्रज मंडल में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ने की संभावना जताई जा रही है।






















