जिला नजर संवाददाता संजय भारद्वाज
अलीगढ़। मंगलायतन विश्वविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को लागू करने के लिए विशेष पहल की जा रही है। इसी क्रम में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।
“डिज़ाइनग इफेक्टिव कर्रेंकुलम : इमफाँसीजिंग Outcome-Based एजुकेशन एंड इम्प्लीमेंटशन ” विषय पर आयोजित इस सत्र में मुख्य वक्ता डा. नमेष मिगलानी ने आधुनिक पाठ्यक्रम डिजाइन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके परिणाम स्पष्ट और मापने योग्य होने चाहिए।
उन्होंने कोर्स आउटकम (CO), प्रोग्राम आउटकम (PO) और प्रोग्राम स्पेसिफिक आउटकम (PSO) को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, शिक्षण रणनीतियों और मूल्यांकन विधियों के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी बताया, ताकि विद्यार्थियों के प्रदर्शन का पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ आकलन किया जा सके।
इस अवसर पर प्रो. राजीव शर्मा ने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा के अंतर्गत की जा रही पहलों की जानकारी दी। वहीं प्रो. अब्दुल वदूद सिद्दीकी ने बताया कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा पाठ्यक्रमों में संशोधन किया जा रहा है।
संवाद सत्र में शिक्षकों ने विद्यार्थियों के मूल्यांकन असेसमेंट पर भी गहन चर्चा की। कार्यक्रम के अंत में IQAC निदेशक प्रो. राजेश उपाध्याय ने आभार व्यक्त किया।
संयुक्त कुलसचिव प्रो. दिनेश शर्मा ने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।
इस दौरान डीन एकेडमिक प्रो. अम्बरीष शर्मा, प्रो. दिनेश पांडेय, प्रो. अनुराग शाक्य, प्रो. सिद्धार्थ जैन, प्रो. जितेंद्र सिंह, प्रो. अशोक उपाध्याय, डा. सोनी सिंह, डा. लव मित्तल और डा. पूनम रानी सहित कई शिक्षकों ने अपने विचार साझा किए।























