दैनिक जिला नजर संवाददाता
फतेहाबाद/आगरा: मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह के निरीक्षण के अगले ही दिन ग्राम पंचायत धिमश्री के उपग्राम बांसबले में जलभराव की भयावह तस्वीर सामने आई। गांव के तीनों तालाब ओवरफ्लो होने से मुख्य सीसी खरंजा करीब तीन फीट पानी में डूब गया। हालात ऐसे हैं कि स्कूली बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग जान जोखिम में डालकर पानी से होकर गुजरने को मजबूर हैं। जल निकासी के सभी इंतजाम नाकाम होने पर ग्राम प्रधान को ट्रैक्टर में पंपसेट लगाकर पानी बाहर निकालना पड़ रहा है।
गांव में हनुमान मंदिर के पास स्थित तालाब , भूमिया वाला तालाब तथा जैन मोहल्ले का तालाब तीनों पूरी तरह भरकर उफान पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हनुमान मंदिर वाले तालाब की पिछले दस वर्षों से सफाई नहीं कराई गई, जबकि तीनों तालाबों पर अतिक्रमण होने से उनकी जलधारण क्षमता लगातार घटती गई। लगातार बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए।
सबसे अधिक परेशानी कुशवाहा मोहल्ले के लोगों को झेलनी पड़ रही है। गांव का मुख्य मार्ग जलमग्न होने से आवागमन ठप जैसा हो गया है। तालाब में फैली जलकुंभी के कारण कई पशु उसमें फंस चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पशु तालाब में तो चले जाते हैं, लेकिन बाहर नहीं निकल पाते।
गांव का सबसे बड़ा खतरा भूमिया वाला तालाब बना हुआ है। ऊपर से समतल दिखाई देने वाला यह तालाब अंदर से दलदली है। जो लगभग 25 फीट गहरा है। ग्रामीणों के अनुसार इसमें अब तक एक दर्जन से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है।

ग्राम प्रधान धनवान सिंह ने बताया कि भूमिया वाले तालाब की दो वर्ष पहले खुदाई कराई गई थी, लेकिन लोगों द्वारा लगातार कूड़ा और मिट्टी डालने से उसकी सतह भर गई और उस पर घास उग आई। गांव के पानी की निकासी के लिए बाहर स्थित तालाब तक पाइपलाइन भी डाली गई थी, लेकिन वह तालाब भी ओवरफ्लो हो जाने से पूरी व्यवस्था बेकार साबित हो गई।
फिलहाल ट्रैक्टर में पंपसेट लगाकर पानी निकाला जा रहा है। बुधवार को एडीओ पंचायत नरेंद्र पाल सिंह, एडीओ ग्राम्य विकास एमपी सिंह, ग्राम सचिव अजय कुमार तथा लेखपाल ने गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
ग्रामीणों ने सीसी खरंजे को ऊंचा कराने की मांग उठाई, लेकिन अधिकारियों ने इसे स्थायी समाधान नहीं माना। उनका कहना था कि ऐसा करने से दूसरे मोहल्लों में जलभराव की समस्या पैदा हो जाएगी। इस जवाब से कुशवाहा समाज में नाराजगी फैल गई।
अधिकारियों के सामने ही भिड़ गए दो पक्ष : निरीक्षण के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब सीताराम कुशवाहा ने उत्तम सिंह पर खरंजा निर्माण रुकवाने का आरोप लगाया। आरोप-प्रत्यारोप बढ़ते ही दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और हाथापाई की नौबत आ गई। मौके पर मौजूद अधिकारियों और ग्रामीणों ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
उधर, उपग्राम झारपुरा में भी जलभराव से लोगों की मुश्किलें कम नहीं हैं। वहां भी ग्राम प्रधान द्वारा पंपसेट से पानी निकलवाया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तालाबों से अतिक्रमण नहीं हटेगा, नियमित सफाई नहीं होगी और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं बनेगी, तब तक हर बरसात में यही हालात दोहराए जाते रहेंगे।
यह है राजस्व अभिलेखों में दर्ज : राजस्व अभिलेखों के अनुसार गांव में तीन तालाब दर्ज हैं। पहला तालाब हनुमान मंदिर के पास स्थित है, जो गाटा संख्या 1495 में 0.979 हेक्टेयर (करीब 9,790 वर्गमीटर) क्षेत्रफल में दर्ज है। दूसरा भूमिया वाला तालाब गाटा संख्या 1520 में 2.0523 हेक्टेयर (करीब 20,523 वर्गमीटर) क्षेत्रफल में दर्ज है। जो राजस्व अभिलेखों में आवादी दर्ज है।
तीसरा तालाब जैन मोहल्ले में स्थित है। इसका रिकार्ड न होने से पता नहीं चल सका कि क्षेत्रफल कितना है। वर्तमान में तीनों तालाब पूरी तरह भरकर ओवरफ्लो हो चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाबों पर हुए अतिक्रमण और समय पर सफाई न होने से उनकी जलधारण क्षमता घट गई है, जिसके कारण बारिश का पानी गांव की गलियों और मुख्य मार्ग पर भर गया है।





















