गोविन्द पाराशर– संवाददाता आगरा
आगरा। दस दिन पहले डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित कर दिए जाने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियों के बीच अचानक जी उठी महिला का आखिरकार रविवार को देहावसान हो गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 65 वर्षीया महिला शीला देवी पत्नी स्व. हरिओम माहौर का पिछले दस दिन से शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
परिवार को उम्मीद थी कि शायद मां एक बार फिर आंखें खोलेंगी। एक सप्ताह तक परिवार के लोग अस्पताल में उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना करते रहे। लेकिन रविवार की सुबह शीला देवी की जिंदगी की जंग थम गई। शीला देवी ने अंतिम सांस ली तो बेटे सुनील समेत परिवार के लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। मृतका लीवर संबंधी बीमारी से पीड़ित थीं।
पूर्व में बरेली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टर ने विगत तीस जुलाई की तड़के उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद बेटा सुनील माहौर एंबुलेंस से उनका शव लेकर शाम करीब सात बजे आगरा स्थित घर पहुंचा था।
शव को घर के एक कमरे में जमीन पर रखा गया। अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। फूल-मालाएं और अन्य सामान आ गया था। रिश्तेदार अंतिम विदाई के लिए पहुंचने लगे थे। इसी दौरान दामाद अंतिम प्रणाम करने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने सास के पैर छुए, महिला के शरीर में हलचल हुई और वह जीवित हो गई थीं।
आनन-फानन में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद रविवार की सुबह शीला देवी ने अस्पताल में अंतिम सांस ली। शीला देवी के निधन की खबर से परिवार में फिर शोक का वातावरण व्याप्त हो गया





















