पुनर्वसु नक्षत्र और उदया तिथि के संयोग से 27 मार्च को ही मनाई जाएगी रामनवमी,शुभ योगों ने बढ़ाया धार्मिक महत्व
रामनवमी का आध्यात्मिक महत्व
सनातन परंपरा में रामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक मानी जाती है। महर्षि आश्रम के आचार्य राज गुरुजी महाराज के अनुसार, त्रेता युग में चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था।
यह अवतार धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और मर्यादा की पुनर्स्थापना का संदेश देता है।
27 मार्च को ही क्यों मनाई जाएगी रामनवमी?
🔸 तिथि का गणित और नक्षत्र का संयोग
पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 26 मार्च सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च सुबह 10:06 बजे तक रहेगी।
हालांकि 26 मार्च को आद्रा नक्षत्र है, जबकि 27 मार्च को पुनर्वसु नक्षत्र और उदया तिथि का संयोग बन रहा है। इसी कारण रामनवमी 27 मार्च को मनाना शास्त्र सम्मत माना गया है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
🔹 मध्याह्न काल (राम जन्म समय):
सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक
इसी समय को भगवान श्रीराम के जन्म का सर्वश्रेष्ठ पूजन काल माना गया है।
✨ इस बार खास क्यों है रामनवमी?
🔸 बन रहे हैं दुर्लभ शुभ योग
इस वर्ष रामनवमी कई प्रभावशाली ग्रह योगों के साथ आ रही है मेष राशि में शुक्र का गोचर
• गजकेसरी योग (गुरु-चंद्र युति)
• नवपंचम राजयोग (गुरु-मंगल प्रभाव)
• त्रिग्रही योग
• सर्वार्थ सिद्धि योग
• रवि योग
ज्योतिषीय दृष्टि से यह दिन अत्यंत फलदायी और शुभ कार्यों के लिए विशेष माना जा रहा है।
दुर्गा अष्टमी और कन्या पूजन
🔹 26 मार्च को दुर्गा अष्टमी
नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है।
अष्टमी के शुभ मुहूर्त:
• अभिजीत मुहूर्त: 12:08 से 12:56
• अमृत काल: 06:49 से 08:20
• ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 से 05:39
🔶 नवमी (27 मार्च) को भी कन्या पूजन का अवसर
यदि अष्टमी को संभव न हो, तो नवमी पर भी कन्या पूजन किया जा सकता है।
📌 नवमी के शुभ मुहूर्त:
🔹सर्वार्थ सिद्धि योग: 06:17 से 03:24 तक
🔹अभिजीत मुहूर्त: 12:02 से 12:51
🔹लाभ-उन्नति मुहूर्त: 07:50 से 09:22
कन्या पूजन के नियम और महत्व
शास्त्रों में कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है—
🔸 आयु का ध्यान आवश्यक:
2 से 10 वर्ष की 9 कन्याएं और एक बटुक भैरव को भोजन कराना शुभ माना गया है।
🔸 पूजन विधि:
• कन्याओं के चरण धोकर तिलक करें
• श्रद्धा अनुसार दक्षिणा दें
• माता दुर्गा से सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें
🟡 रामनवमी और दुर्गा अष्टमी का यह पावन संयोग न केवल धार्मिक आस्था को सशक्त करता है, बल्कि जीवन में मर्यादा, संस्कार और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है।
“राज गुरुजी महाराज”
• मोबाइल – 94173 35633
• महर्षि आश्रम विंध्याचल धाम























