प्रिय पाठकों,चैत्र की प्रथम किरण जब आकाश को स्पर्श करती है, तब सनातन कालचक्र एक बार पुनः नवजीवन का संदेश लेकर लौटता है। विक्रम संवत 2082 की विदाई और 2083 के आगमन पर हम खड़े हैं—एक ऐसे क्षण में, जहाँ बीते हुए का मूल्यांकन और आने वाले का स्वागत एक साथ होता है। यह संवत्सर सिद्धार्थी नाम से जाना जाता है, जिसमें सूर्यदेव ही राजा और मंत्री दोनों पदों पर विराजमान हैं—एक दुर्लभ योग, जो तेज, नेतृत्व, आत्मविश्वास और प्रखरता का प्रतीक है, किन्तु साथ ही अनुशासनहीनता में अग्नि-संहार भी ला सकता है।
इस परिवर्तन के मध्य दो शब्द हमारे सामने खड़े हैं—**उपेक्षा** और **अपेक्षा**। उपेक्षा वह मौन अपराध है, जो हमने बार-बार किया। हमने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को उपेक्षित किया—जब पश्चिमी नववर्ष की चमक में गुढ़ी-पड़वा की सादगी फीकी पड़ गई, जब रामनवमी की भक्ति सोशल मीडिया की पोस्ट में सिमट गई। हमने पर्यावरण की उपेक्षा की—नदियों को विषाक्त करते, वनों को काटते, जलवायु की चेतावनी को अनसुना करते रहे। हमने आंतरिक शांति की उपेक्षा की—जब व्यस्तता ने ध्यान को, योग को, स्वाध्याय को कोने में धकेल दिया। और सबसे बड़ी उपेक्षा—हमने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के उस महामंत्र को भुला दिया, जिसके कारण समाज में विभेद की खाई गहरी होती गई।
सूर्य के इस प्रबल प्रभाव में उपेक्षा अब और नहीं सही जा सकती। यह तेज यदि अनियंत्रित रहा, तो ग्रीष्म की तपन, संघर्ष की ज्वाला और आंतरिक अशांति को आमंत्रित करेगा। किन्तु यही सूर्य यदि संयम और सदुपयोग से पूजा गया, तो वह जीवन को प्रकाश, स्वास्थ्य और सफलता से भर देगा।
अब **अपेक्षा** का समय है—वह आकांक्षा जो संकल्प में बदलनी है। अपेक्षा करें सांस्कृतिक पुनरुत्थान की—प्रत्येक घर में भगवा ध्वज लहराए, प्रत्येक बालक अपनी परंपरा का गौरव अनुभव करे। अपेक्षा करें आर्थिक समृद्धि की—बुध के धनेश पद पर होने से व्यापार, रोजगार और फसलों में वृद्धि का योग है, किन्तु यह मेहनत और नवोन्मेष से ही साकार होगा। अपेक्षा करें व्यक्तिगत उन्नति की—मिथुन, कन्या, मीन, मकर जैसी राशियों के लिए विशेष शुभ संकेत हैं, पर प्रत्येक राशि वाले यदि कर्म-निष्ठा अपनाएँगे, तो सूर्य का आशीर्वाद अवश्य मिलेगा। अपेक्षा करें राष्ट्रीय एकता की—जब हम उपेक्षा के अंधेरे को त्यागकर अपेक्षा के प्रकाश को अपनाएँगे, तब राष्ट्र सशक्त होगा।
यह नवसंवत्सर हमें स्मरण कराता है कि जीवन संतुलन का नाम है। जो बीत गया, उसे क्षमा करो; जो आ रहा है, उसके लिए दृढ़ संकल्प लो। विक्रमादित्य की भाँति आंतरिक शत्रुओं—अहंकार, आलस्य, द्वेष—पर विजय प्राप्त करो।
सभी देशवासियों को जिला नजर परिवार की ओर से विक्रम संवत 2083 की हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह वर्ष आपके जीवन में सूर्य की भाँति तेज, स्वास्थ्य, समृद्धि और आनंद लेकर आए।
नवसंवत्सर मंगलमय हो!
जय हिंद! जय भारत!























