आगरा मंडल ने रेल अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए आज दिनांक 18.07.2026 को होडल –शोलाका खंड की तीसरी एवं चौथी लाइन पर 10.34 रूट किलोमीटर में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली (Automatic Signalling) का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया। यह कार्य मात्र 120 मिनट के ट्रैफिक ब्लॉक में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस उपलब्धि के साथ ही आगरा मंडल के भूतेश्वर–शोलाका रेल खंड के कुल 61 किलोमीटर पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली का कार्य पूर्ण हो गया है।
परियोजना के अंतर्गत दो नए रिले हट, 12 ऑटोमैटिक सिग्नल तथा अत्याधुनिक हिताची MLK-II इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई। सुरक्षा एवं विश्वसनीयता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए 56 ट्रैक सेक्शनों में फ्रॉशर (Frauscher) निर्मित एक्सल काउंटर आधारित डुअल डिटेक्शन प्रणाली लगाई गई। इसके अतिरिक्त एलसी-554, एलएससी-556 एवं एलसी-556ए इंजीनियरिंग लेवल क्रॉसिंग गेटों को नई सिग्नलिंग प्रणाली से एकीकृत किया गया।
परियोजना के अंतर्गत आधुनिक इंटीग्रेटेड पावर सप्लाई (IPS) प्रणाली, फायर अलार्म यूनिट तथा शोलाका यार्ड का पूर्ण आधुनिकीकरण भी किया गया, जिससे वीडीयू आधारित संचालन एवं रीसेटिंग की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।होडल–शोलाका खंड की तीसरी एवं चौथी लाइन पर पूर्व में प्रचलित एब्सलूट ब्लॉक वर्किंग (Absolute Block Working) प्रणाली को उन्नत कर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली में परिवर्तित किया गया है।
यह कार्य महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे श्री नरेश पाल सिंह व मंडल रेल प्रबंधक आगरा श्री गगन गोयल के मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। परियोजना की सफलता में मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता (परियोजना), उत्तर मध्य रेलवे श्री खुश गुप्ता, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार अभियंता /संकेत, आगरा श्री अनिल पटेल, आगरा मंडल तथा मुख्यालय की ड्रॉइंग टीम के तकनीकी सहयोग एवं समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से होने वाले प्रमुख लाभ
रेल खंड की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
एक ही खंड में सुरक्षित रूप से एक से अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा। ट्रेनों को अगले स्टेशन से लाइन क्लियर की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी, जिससे संचालन अधिक सुगम होगा। ट्रेनों का डिटेंशन (अनावश्यक ठहराव) कम होगा। ट्रेनों की समयपालनता में सुधार होगा।रेल यातायात की दक्षता, सुरक्षा एवं विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। भविष्य में बढ़ते रेल यातायात की आवश्यकताओं को पूरा करने में यह प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।






















