• कोर्ट ने सिकंदरा पुलिस से मांगी थी आख्या फिर भी थाना पुलिस नहीं चेती
आगरा। सिकंदरा में दिनदहाड़े ज्वेलर्स की हत्या करने और आभूषण लूटने में फरार चल रहे बदमाश को आगरा पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी। बड़ी आसानी से उसने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। हैरानी की बात यह है कि पुलिस को इस बात की सूचना होते हुए भी कि वह आत्म समर्पण करेगा फिर भी उसे पकड़ने के प्रयास नहीं किए गए। इस बात को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिकंदरा में दो मई को बाइक सवार दो बदमाशों ने बालाजी ज्वेलर्स के शोरूम में लूटपाट की थी। 22 लाख रुपये से ज्यादा के जेवरात लूटे थे। शोरूम पर सेल्स गर्ल रेनू और एक अन्य ग्राहक युवती मौजूद थीं। बदमाशों ने भागते समय शोरूम के सामने ही सराफा कारोबारी योगेश चौधरी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना से कारोबारियों में आक्रोश था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बदमाशों की शिनाख्त की थी। 6 मई को पुलिस ने मुठभेड़ में मुख्य आरोपी बिचपुरी के मघटई के रहने वाले अमन को ढेर कर दिया था। उसका भाई भी गिरफ्तार किया गया था।
हत्या और लूट में शामिल रहा फारूक फरार हो गया था। पुलिस उसकी तलाश में लगी हुई थी। फारूख ने आत्मसमर्पण करने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। इस पर सिकंदरा थाने से आख्या मांगी गई। पुलिस को यह जानकारी हो गई कि वह आत्मसमर्पण करेगा। इसके बाद भी वह चौकन्ना नहीं हुई।
मंगलवार को बड़ी आसानी से उसने न्यायालय में आत्म समर्पण कर दिया। इसके बाद पुलिस और एसओजी की जमकर किरकिरी हो रही है। सवाल यह है कि पुलिस साढ़े तीन महीने में फारूक को नहीं पकड़ पाई। जबकि वह अपने हाईटेक होने के कसीदे पढ़ती है।
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