हाथरस|संजय भारद्वाज जिला नजर

सर्द रातों की कड़कड़ाती ठंड में, जब पूरा शहर गर्म कंबलों में दुबका हुआ है, तब राष्ट्रीय सवर्ण परिषद (RSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरैय्या खुले आसमान के नीचे धरने पर डटे हुए हैं। यह धरना अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है, और प्रदर्शनकारी की दृढ़ इच्छाशक्ति ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है।

UGC के नए इक्विटी एक्ट 2026 और SC/ST एक्ट में बदलाव की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब सवर्ण समाज की एक बड़ी क्रांति का रूप लेता जा रहा है। प्रशासन की सख्ती, पुलिस की भारी तैनाती और घर को छावनी में तब्दील करने के बावजूद धवरैय्या पीछे हटने को तैयार नहीं।

धरने का बैकग्राउंड: पदयात्रा पर रोक ने भड़काई चिंगारी

पंकज धवरैय्या, जो ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखते हैं और सनातन मूल्यों के प्रति समर्पित हैं, ने 7 फरवरी को हाथरस से दिल्ली तक ‘सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ निकालने की योजना बनाई थी। इस यात्रा का उद्देश्य UGC रेगुलेशंस 2026 को वापस लेने और SC/ST एक्ट में संशोधन की मांग करना था, जिसे वे सवर्ण समाज पर ‘थोपा गया अभिशाप’ मानते हैं। लेकिन प्रशासन ने जातिवाद को बढ़ावा देने का हवाला देकर यात्रा पर रोक लगा दी। नाराज धवरैय्या ने तुरंत अपने घर के बाहर धरना शुरू कर दिया, जो अब तीन दिनों से जारी है। उन्होंने कहा, “अगर अनुमति नहीं मिली, तो मैं अकेला ही शांतिपूर्ण पदयात्रा निकालूंगा। जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, धरना खत्म नहीं होगा।”

धरनास्थल पर मौजूद समर्थकों ने बताया कि ठंड की वजह से धवरैय्या की तबीयत बिगड़ गई है, लेकिन वे हार नहीं मान रहे। पूरे घर पर पुलिस की भारी फोर्स तैनात है, और किसी बाहरी व्यक्ति या पदाधिकारी को मिलने की इजाजत नहीं दी जा रही। फिर भी, ग्वालियर से अधिवक्ता अनिल मिश्रा जैसे समर्थक धरनास्थल पर पहुंचने वाले हैं, और हाथरस, अलीगढ़ समेत आसपास के जिलों के युवा उनके साथ खड़े हो रहे हैं।

मांगें और आंदोलन की गहराई: सवर्ण समाज की पुकार

धवरैय्या का आंदोलन सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि सवर्ण समाज की व्यापक असंतोष की अभिव्यक्ति है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं

UGC इक्विटी एक्ट 2026 की वापसी: इसे सवर्णों के खिलाफ भेदभावपूर्ण माना जा रहा है, जो उच्च शिक्षा में आरक्षण और अन्य नीतियों को प्रभावित करता है।

• SC/ST एक्ट में संशोधन: प्रदर्शनकारी इसे दुरुपयोग का माध्यम बताते हैं और इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं।

जातीय आरक्षण की समाप्ति: धवरैय्या ने इसे ‘अमीरों का आरक्षण’ करार दिया है और कहा है कि यह गरीब सवर्णों को हाशिए पर धकेल रहा है।

इससे पहले 1 फरवरी को सवर्ण संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था, जिसमें बाजार बंदी और प्रदर्शन हुए। अब विभिन्न जिलों में संगठन जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंप रहे हैं, और आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर फैलाने की कोशिश की जा रही है। धवरैय्या ने मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “ब्राह्मण, क्षत्रिय, बनिया और लाला किसी के बंधुआ मजदूर नहीं। UGC नहीं, UCC चाहिए!”

प्रशासन की चुप्पी और बढ़ता समर्थन

फिलहाल, हाथरस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस की सख्ती ने आंदोलन को और तीव्र कर दिया है, और सोशल मीडिया पर #UGC_RollBack, #सनातन_स्वाभिमान_पदयात्रा जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। समर्थक इसे ‘क्रांति’ बता रहे हैं और कहते हैं कि अगर सरकार नहीं जागी, तो आंदोलन और तेज होगा।

यह धरना न सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा है, बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। क्या सरकार इन मांगों पर ध्यान देगी, या आंदोलन और फैलेगा? आने वाले दिन बताएंगे।

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