लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ पिछले एक साल से चला आ रहा कर्मचारियों का आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर धधकने को तैयार है। बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति (नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स) के आह्वान पर 27 नवंबर को देशभर के करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे। यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के समर्थन में होगा, जहां निजीकरण का फैसला पिछले साल 25 नवंबर को पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन द्वारा एकतरफा घोषित किया गया था।
आंदोलन की पृष्ठभूमि: एक साल का दर्द और दमन
उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (वाराणसी) और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (आगरा) के निजीकरण के खिलाफ 27 नवंबर 2024 से शुरू हुआ यह संघर्ष आज 359वें दिन में प्रवेश कर चुका है। बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के अनुसार, यह आंदोलन न केवल कर्मचारियों का है, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर चलाया जा रहा है, जो इसे देश का एक अनूठा प्रयोग बनाता है।
पिछले एक साल में कर्मचारियों ने न केवल सड़कों पर धरना-प्रदर्शन किया, बल्कि भीषण गर्मी के दौरान 11 जून 2025 को 31,486 मेगावाट बिजली आपूर्ति का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इसके बावजूद, पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने आंदोलनकारियों पर दमन की कार्रवाई की, जिसमें उत्पीड़न और अन्यायपूर्ण कदम शामिल हैं। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक निजीकरण का फैसला पूरी तरह निरस्त नहीं होता और आंदोलन के दौरान हुई सभी उत्पीड़नकारी कार्रवाइयां वापस नहीं ली जातीं, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं।
27 नवंबर का प्लान: UP से दिल्ली तक गूंजेगा नारा
- प्रतिभागी: देशभर के 27 लाख बिजली कर्मचारी, अभियंता, जूनियर इंजीनियर, संविदा कर्मी और अधिकारी। राष्ट्रीय समिति में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज जैसी प्रमुख यूनियनें शामिल हैं।
- स्थान: उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में जोरदार विरोध प्रदर्शन। खासतौर पर वाराणसी (पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय) और आगरा (दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय) में किसानों व उपभोक्ताओं के साथ बड़े पैमाने पर रैलियां और धरने आयोजित होंगे। राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत प्रमुख शहरों में समर्थन प्रदर्शन होंगे।
- समय और रूप: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन, जिसमें नारे, पोस्टर और जागरूकता अभियान शामिल होंगे। बिजली सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जैसा कि पिछले आंदोलनों में देखा गया।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा, “देशव्यापी समर्थन से उत्साहित UP के बिजली कर्मचारी नई ऊर्जा के साथ 27 नवंबर से आंदोलन को और तेज करेंगे। यह केवल निजीकरण रोकने की लड़ाई नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा का संकल्प है।”
क्यों हो रहा विरोध? निजीकरण के खतरे
कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से बिजली दरें आसमान छू लेंगी, ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित होगी और हजारों नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। पिछले जुलाई 2025 में भी इसी मुद्दे पर 9 जुलाई को देशव्यापी हड़ताल हुई थी, जिसमें लाखों कर्मचारी शामिल हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन सरकार पर दबाव बनाने में सफल हो सकता है, खासकर जब यह किसानों-उपभोक्ताओं को जोड़ता है।
आगे की रणनीति: हड़ताल से आगे का सफर
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी न हुईं, तो दिसंबर में चरणबद्ध हड़ताल की योजना है। फिलहाल, 27 नवंबर का प्रदर्शन एकजुटता का प्रतीक बनेगा। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे इस मुद्दे पर जागरूक रहें और समर्थन दें।

