🔹गोविन्द पाराशर- संवाददाता

खेरागढ़/आगरा। यूपी के आगरा जिले की खेरागढ़ तहसील में स्थित कुसियापुर गांव के पास उटंगन नदी में 2 अक्टूबर 2025 को दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसमें 13 युवाओं में से 12 की डूबने से मौत हो गई। नदी का अधिकांश हिस्सा उथला था, लेकिन अवैध रेत खनन से बने गहरे गड्ढे ने युवाओं को भंवर की तरह खींच लिया। छह दिनों तक चले व्यापक बचाव अभियान के बाद 7 अक्टूबर को अंतिम शव बरामद होने के साथ सर्च ऑपरेशन समाप्त हो गया। यह घटना अवैध खनन की लापरवाही को उजागर करती है, जिसने एक पूरा गांव शोक में डुबो दिया।

घटना का पूरा चक्र: पृष्ठभूमि और विस्तृत विवरण

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में खेरागढ़ क्षेत्र की उटंगन नदी में अवैध रेत खनन वर्षों से चला आ रहा है। नदी में सामान्यतः पानी की कमी रहती है, लेकिन इस बार मानसून के बाद थोड़ा पानी बह रहा था। 2 अक्टूबर को नवरात्रि के अंतिम दिन कुसियापुर गांव के 16 से 25 वर्षीय 13 युवा दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन करने नदी पहुंचे। वे निर्धारित स्थान से आगे बढ़ गए और लगभग दोपहर 1 बजे के आसपास एक 25 फीट गहरे और 6 मीटर चौड़े गड्ढे में फिसल गए।

प्रत्यक्षदर्शियों और बच गए युवक विष्णु के अनुसार, नदी में केवल 1-3 फीट पानी था, लेकिन गड्ढा भंवर जैसा था, जहां रेत और कीचड़ ने युवाओं को फंसाकर डुबो दिया। पांच युवा सबसे आगे थे, जो गड्ढे में गिरे, और बाकी उन्हें बचाने के लिए कूद पड़े। विष्णु किसी तरह नदी किनारे की दीवार पकड़कर बच गया।

हादसे के तुरंत बाद परिजनों में कोहराम मच गया। स्थानीय लोग और पुलिस ने प्रारंभिक बचाव प्रयास शुरू किए, लेकिन गड्ढे की गहराई और कीचड़ के कारण कई युवा फंस गए। एक युवक का शव तुरंत निकाला गया, लेकिन बाकी की तलाश मुश्किल हो गई।

बचाव और सर्च ऑपरेशन: चुनौतियां और सफलता

हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) की फ्लड कंपनी और स्थानीय गोताखोरों की टीमें लगातार कार्यरत रहीं। ऑपरेशन 100 घंटे से अधिक चला, जिसमें 60 एनडीआरएफ जवान और 19 पैरा ब्रिगेड सदस्य शामिल थे। बच गए विष्णु को सीन रीक्रिएट करने के लिए बुलाया गया, जिसकी मदद से ‘मौत का गड्ढा’ की पहचान हुई। 6 अक्टूबर को सीन रीक्रिएशन के दौरान नौवां शव बरामद हुआ।

बचाव राहत कार्य में चुनौतियां:

राजस्थान के धौलपुर जिले से पार्वती नदी का पानी (2107 क्यूसेक) उटंगन में छोड़े जाने से बहाव तेज हो गया, जिससे अस्थायी बांध टूट गए और ऑपरेशन बाधित हुआ। आगरा डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने पहले ही राजस्थान अधिकारियों से पानी न छोड़ने का अनुरोध किया था, लेकिन लापरवाही बरती गई। इसके बाद पानी रोक दिया गया। ग्रामीणों ने अवैध खनन से बने गड्ढों को मुख्य समस्या बताया, जहां क्विकसैंड जैसी स्थिति ने शवों को मिट्टी के नीचे दबा दिया।

7 अक्टूबर को सुबह सचिन उर्फ महावीर और दीपक के शव, दोपहर में गजेंद्र का, और शाम को अंतिम लापता हरेश का शव बरामद हुआ। सभी 12 शव उसी गड्ढे के 6 मीटर दायरे से निकले। फतेहपुर सीकरी सांसद राजकुमार चाहर ने पुष्टि की कि सर्च समाप्त हो गया।

कारण: अवैध खनन की करुण कथा

हादसे का मुख्य कारण अवैध रेत खनन है। खनन माफिया ने नदी में 15-25 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए, जो मूर्ति विसर्जन के लिए आए युवाओं के लिए घातक जाल बने। सांसद चाहर ने कहा, “अगर खनन का गड्ढा न होता तो यह हादसा न होता।” डीएम ने खनन की अफवाहों को खारिज किया, लेकिन ग्रामीणों और एनडीआरएफ निरीक्षक विनोद कुमार ने इसे पुष्ट किया। उटंगन नदी में खनन से कच्चे रास्ते भी बने, जो हादसे वाली जगह के सामने हैं।

मानवीय प्रभाव: परिवारों पर गहरा आघात

कुसियापुर गांव में शोक की लहर है। नवविवाहिता के परिवार, बेबस पिता रेवती प्रसाद जैसे कई घर उजड़ गए। हरेश के पिता का दर्द छलका, जो बेटे को घर बुलाकर लाए थे। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया, सुरक्षा की मांग की। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त किया।

आधिकारिक प्रतिक्रियाएं और भविष्य की कार्रवाई

आगरा डीएम और पुलिस कमिश्नर ने खुद निरीक्षण किया। सांसद चाहर ने राजस्थान प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया और सीएम भजन लाल शर्मा व केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से शिकायत करने की बात कही। रोकथाम के लिए नदी किनारे चिह्नांकन, स्थायी सुरक्षा और बांधों पर निगरानी बढ़ाने की मांग हो रही है। डीएम ने लेखपाल व एसडीएम को बांधों पर तैनात किया। यह घटना अवैध खनन पर सख्ती की जरूरत बताती है।

यह हादसा न केवल एक गांव की त्रासदी है, बल्कि पर्यावरणीय लापरवाही का प्रतीक। प्रशासन को अब ठोस कदम उठाने होंगे ताकि ऐसी घटनाएं न हों।

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