लखनऊ। विवादित वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर राजधानी लखनऊ में एफआईआर दर्ज की गई है। हजरतगंज थाने में तैनात इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने खुद वादी बनते हुए सीरीज के निर्देशक और संबंधित टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस का कहना है कि सीरीज के शीर्षक और प्रचार सामग्री को लेकर समाज में आक्रोश की स्थिति बन रही थी, जिसे देखते हुए यह कार्रवाई की गई।

पुलिस के अनुसार, वेब सीरीज के प्रचार के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा और शीर्षक को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि सामग्री सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।

कौन हैं इंस्पेक्टर विक्रम सिंह

इंस्पेक्टर विक्रम सिंह वर्तमान में हजरतगंज थाने में तैनात हैं। इससे पहले वे कृष्णानगर थाने में तैनाती संभाल चुके हैं। वर्ष 2001 बैच के सब इंस्पेक्टर रहे विक्रम सिंह मैनपुरी, वाराणसी, झांसी और अयोध्या सहित कई जिलों में सेवा दे चुके हैं। वे साइबर सेल प्रभारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनकी ट्रेनिंग मुरादाबाद में हुई थी।

पुलिस विभाग में सेवा के साथ-साथ वे कुछ मानवीय पहलों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। कृष्णानगर क्षेत्र में तैनाती के दौरान एक निराश्रित वृद्धा के अंतिम संस्कार में सहयोग करने और बच्चों को थाने में आमंत्रित कर पुलिस-जन संवाद कार्यक्रम चलाने जैसी पहलें भी सुर्खियों में रही थीं।

बेहतर कार्य के लिए सम्मान

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2025 में तत्कालीन डीजीपी राजीव कृष्ण द्वारा इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को बेहतर पुलिस कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया था। हजरतगंज जैसे हाई सिक्योरिटी जोन में उनकी कार्यशैली को लेकर विभागीय स्तर पर सराहना दर्ज की गई थी।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस के मुताबिक, वेब सीरीज के निर्देशक और संबंधित टीम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इनमें

  • विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने,

  • धार्मिक/जातिगत भावनाएं आहत करने,

  • सार्वजनिक शांति भंग करने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।

साथ ही आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने का भी आरोप जोड़ा गया है।

एफआईआर में कहा गया है कि शीर्षक एक विशिष्ट समुदाय को अपमानित करने वाला प्रतीत होता है। हालांकि मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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