- > सभी कामगारों को समय से न्यूनतम वेतन की गारंटी
- > युवाओं को नियुक्ति पत्र की गारंटी
- > महिलाओं को समान वेतन और सम्मान की गारंटी
- > 40 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी
- > फिक्स टर्म एम्प्लाइज को एक साल बाद ग्रेच्युटी की गारंटी
- > 40 साल से अधिक आयु वाले श्रमिकों को सालाना मुफ्त हेल्थ चेक-अप की गारंटी
- > ओवरटाइम करने पर दुगने वेतन
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आज से देशभर में चार नई श्रम संहिताओं को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। यह कदम 29 पुराने श्रम कानूनों को सरल और एकीकृत करने की दिशा में ऐतिहासिक है, जो श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करते हुए नियोक्ताओं के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह “श्रमिकों को सशक्त बनाने और आर्थिक विकास को गति देने” का महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्य बदलाव: मिनिमम वेतन से लेकर सामाजिक सुरक्षा तक
नए कानूनों के तहत हर श्रमिक को समय पर न्यूनतम वेतन की गारंटी मिलेगी। अब नियोक्ता 7 तारीख तक वेतन का भुगतान करने के लिए बाध्य होंगे, जिससे देरी, मनमानी और शोषण की गुंजाइश लगभग समाप्त हो जाएगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, ये संहिताएं वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियों से जुड़ी हैं।
- न्यूनतम वेतन संहिता: सभी श्रमिकों के लिए फ्लोर वेज की व्यवस्था, जो क्षेत्रीय और उद्योग-आधारित होगी। देरी पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता: सभी श्रमिकों (18-60 वर्ष) को पीएफ, ईएसआईसी और अन्य बीमा लाभ अनिवार्य। गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी कवरेज मिलेगा।
- औद्योगिक संबंध संहिता: युवाओं को नौकरी की शुरुआत में ही नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) देना अनिवार्य। इससे अनुबंध श्रमिकों के अधिकार मजबूत होंगे और विवाद निपटान तेज होगा।
- महिलाओं के लिए समान वेतन: जेंडर आधारित वेतन भेदभाव समाप्त। समान कार्य के लिए समान वेतन का सख्त नियम लागू, जो महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगा।
ये बदलाव विशेष रूप से आईटी सेक्टर, निर्माण और अनौपचारिक क्षेत्रों में प्रभावी होंगे, जहां करोड़ों श्रमिक लाभान्वित होंगे।
विशेषज्ञों की राय: अवसर और चुनौतियां
श्रम विशेषज्ञों का मानना है कि ये कानून श्रम बाजार को आधुनिक बनाएंगे, लेकिन इम्प्लीमेंटेशन में चुनौतियां हो सकती हैं। “यह श्रमिकों के लिए गेम-चेंजर है, लेकिन राज्यों को नियम बनाने में तेजी दिखानी होगी,” एक वकील ने कहा। आलोचकों का कहना है कि छोटे उद्योगों पर बोझ बढ़ सकता है, हालांकि सरकार ने ट्रांजिशन पीरियड की व्यवस्था की है।
कुल मिलाकर, ये संहिताएं ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में मजबूत कदम हैं, जो श्रमिकों को गरिमापूर्ण जीवन और नियोक्ताओं को लचीली प्रक्रियाएं प्रदान करेंगी। अधिक जानकारी के लिए श्रम मंत्रालय की वेबसाइट देखें।

