नई दिल्ली/वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के खिलाफ फर्जी AI जनरेटेड तस्वीरें और भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। संजय सिंह ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है, जबकि कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए जिन्होंने कथित रूप से मंदिरों और विरासत को नुकसान पहुंचाया।
संजय सिंह के आरोप: मणिकर्णिका घाट ‘तहस-नहस’, अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़ी
संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि मणिकर्णिका घाट को “तहस-नहस” कर दिया गया, कई मंदिर तोड़े गए और काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार कराने वाली माता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा भी क्षतिग्रस्त की गई। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे का विरोध काशी के साधुओं, अहिल्याबाई होलकर परिवार और पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन की ओर से भी किया गया है। संजय सिंह ने कहा, “इतना सब होने के बावजूद एफआईआर मेरे खिलाफ दर्ज की गई। मंदिर तोड़ने वालों पर कार्रवाई कीजिए, विरोध करने वालों को निशाना मत बनाइए।”
एफआईआर में संजय सिंह के अलावा कांग्रेस नेता पप्पू यादव और अन्य 6 लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने घाट के सुंदरीकरण प्रोजेक्ट के बारे में फर्जी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर कर भ्रम फैलाया। संजय सिंह ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मां गंगा के मंदिर और शिवालय से जुड़े स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे काशी के लोगों में आक्रोश है।
संजय सिंह का पलटवार: ‘मुकदमों से नहीं डरते’
एफआईआर दर्ज होने के बाद संजय सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ पहले भी कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने लिखा, “मंदिर तोड़ने का पाप किया गया है, जिसका सबूत सामने है। आंख खोलकर देखिए और एफआईआर उन लोगों पर दर्ज कीजिए जिन्होंने यह किया है।” उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि सवाल उठाने पर FIR दर्ज करना गलत है और यह धार्मिक स्थलों की रक्षा की बजाय विरोध को दबाने की कोशिश है।
विवाद की पृष्ठभूमि
मणिकर्णिका घाट वाराणसी का प्रमुख श्मशान घाट है, जहां सुंदरीकरण प्रोजेक्ट चल रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस दौरान कुछ मंदिरों और ऐतिहासिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि कोई तोड़फोड़ नहीं हुई और शेयर की जा रही तस्वीरें AI जनरेटेड फेक हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, और प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।

