फतेहाबाद (आगरा)। ब्लॉक फतेहाबाद की ग्राम पंचायत चमरौली के बिलईपुरा गांव में अचानक नाले में पानी छोड़े जाने से दर्जनों किसानों की सैकड़ों बीघा खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं। यह घटना किसानों के लिए किसी तबाही से कम नहीं है, जहां उनकी महीनों की मेहनत पानी में बह गई। खेतों में भरे पानी से फसलें सड़ने लगी हैं, और आर्थिक संकट की तलवार किसानों के सिर पर लटक रही है। प्रशासन की लापरवाही पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है, और उन्होंने सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

किसानों का आरोप है कि नाले में बिना किसी सूचना के पानी छोड़ा गया, जिससे उनके खेत पूरी तरह डूब गए। एक प्रभावित किसान ने बताया, “हमारी पूरी फसल बर्बाद हो गई है। कई दिनों से पानी भरा है, लेकिन प्रशासन सोया हुआ है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हमारा परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएगा।” घटना की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को किसान नेता रामनिवास रघुवंशी मौके पर पहुंचे और प्रभावितों से बात की। उन्होंने स्थिति को ‘किसान विरोधी’ करार देते हुए चेतावनी दी कि अगर समस्या का तत्काल समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिला अध्यक्ष दीपक तोमर, मंडल अध्यक्ष राजकुमार, तहसील अध्यक्ष अवधेश कुमार सहित अन्य पदाधिकारी गांव पहुंचे। संगठन के बैनर तले शुरू हुए धरना-प्रदर्शन में किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। शाम करीब 4 बजे तहसीलदार बब्लेश कुमार मौके पर पहुंचे, जहां किसान नेताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पानी की सप्लाई तुरंत बंद करने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है।

किसान नेता दीपक तोमर ने कहा, “यह प्रशासन की घोर लापरवाही है। किसान पहले से ही मौसम की मार झेल रहे हैं, ऊपर से यह मानव निर्मित संकट। हम मुआवजे की मांग कर रहे हैं, और अगर सुनवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।” घटना से क्षेत्र में तनाव का माहौल है, और किसान संगठन आगे की रणनीति बनाने में जुटे हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जिससे किसानों का आक्रोश और बढ़ रहा है।

आगे क्या? आंदोलन की धमकी

किसान यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर 24 घंटों में पानी बंद नहीं किया गया और मुआवजे की घोषणा नहीं हुई, तो ब्लॉक स्तर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं जल प्रबंधन की कमी को उजागर करती हैं, और किसानों की आजीविका को खतरे में डाल रही हैं। क्या प्रशासन समय रहते कदम उठाएगा, या किसान सड़कों पर उतरेंगे? स्थिति पर नजर बनी हुई है।

सुशील गुप्ता

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