आगरा। ताजनगरी आगरा के सबसे व्यस्त व्यापारिक केंद्र राजा की मंडी में दशकों पुराना लाभ चंद मार्केट आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद आज सुबह 11 बजे राजस्व टीम द्वारा जमीन की पैमाइश की जानी थी, जिसके आधार पर बाजार के हिस्से पर बुलडोजर चलने का फैसला हो सकता है। यदि पैमाइश में साबित हुआ कि बाजार का हिस्सा सार्वजनिक सड़क या फुटपाथ पर अतिक्रमण करता है, तो प्रशासन बिना किसी नोटिस के कार्रवाई कर सकता है।
इस खबर ने न केवल 60 दुकानदारों की नींद उड़ा दी है, बल्कि पूरे बाजार के स्वरूप को बदलने का खतरा पैदा कर दिया है। पूर्व जज के पट्टे से जुड़ी धोखाधड़ी के आरोपों तक की कहानी अब खुलकर सामने आ रही है। वर्तमान समय में (11:46 AM IST), पैमाइश के नतीजों पर कोई आधिकारिक अपडेट नहीं आया है, लेकिन प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच चुकी होगी।
पृष्ठभूमि: पट्टे की कहानी और विवाद
यह बेशकीमती जमीन पूर्व जज स्वर्गीय मिलाप चंद जैन को विशेष शर्तों पर पट्टे पर दी गई थी। उनके वारिस आज भी इसका संचालन कर रहे हैं। हालांकि, एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि पट्टे की शर्तों का उल्लंघन किया गया और धोखाधड़ी हुई, जिसके चलते पट्टा बहुत पहले निरस्त हो चुका था। बावजूद इसके, दशकों से यहां काबिज दुकानदारों से हर महीने लाखों रुपये का किराया वसूला जा रहा था, जो अब इस विवाद की जड़ बन गया है।
मार्केट के निचले हिस्से में 60 दुकानें हैं, जहां पीढ़ियों से व्यापार चल रहा है। ऊपरी मंजिल पर चंद्रलोक और धर्मलोक होटल भी संचालित हैं, जिनके अस्तित्व पर अब सवालिया निशान लग गया है। एक दुकानदार द्वारा किराए के खिलाफ उठाई गई आवाज ने इस पूरे मामले को कानूनी जंग में बदल दिया।
आज की कार्रवाई: पैमाइश और संभावित बुलडोजर एक्शन
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी है कि 10 फरवरी को सुबह 11 बजे मौके पर ही जमीन की नपाई की जाए। यदि राजस्व दस्तावेजों में यहां सड़क या फुटपाथ दर्ज मिला, तो इसे तत्काल अतिक्रमण मानकर मुक्त कराया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पक्ष की अनुपस्थिति में भी कार्रवाई नहीं रुकेगी। एडीएम प्रोटोकॉल प्रशांत तिवारी ने बताया कि एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित की गई है।
यह प्रशासन के लिए ‘करो या मरो’ वाली स्थिति है। यदि अतिक्रमण साबित हुआ, तो बुलडोजर चलने से बाजार का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है, जिससे सैकड़ों लोगों का रोजगार खतरे में पड़ जाएगा।
आगे की कानूनी लड़ाई
भले ही सड़क का मामला आज साफ हो जाए, लेकिन उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 की धारा 18 की वैधता पर अभी बड़ी जंग बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की छूट दी है, जिससे किराए की जटिलताओं का नया दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, अदालत ने प्रभावित पक्षों को पुनर्वास की उम्मीद देते हुए कहा है कि वे सक्षम प्राधिकारी के सामने अपनी गुहार लगा सकते हैं।
राजा की मंडी आगरा का एक प्रमुख बाजार है, जहां कपड़े, जूते-चप्पल, ज्वेलरी और रोजमर्रा की वस्तुओं का कारोबार होता है। इस बाजार का ध्वस्त होना स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकता है। हम इस मामले पर लगातार अपडेट देते रहेंगे।


