आगरा: ताजनगरी के एकता थाना क्षेत्र के लोधई गांव में एक युवक की हत्या का मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। 24 वर्षीय लवकेश तोमर (पेशे से बिजली मिस्त्री) की हत्या उसकी पत्नी गौरी (23) ने अपने चचेरे देवर सुंदर तोमर के साथ मिलकर की। हत्या के बाद दोनों ने शव को साड़ी के फंदे से पंखे पर लटकाकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की और परिजनों को गुमराह कर अंतिम संस्कार भी करा दिया।
लवकेश की शादी चार साल पहले राजस्थान के धौलपुर जिले के सहपऊ (भोला गांव) निवासी गौरी से हुई थी। दोनों का तीन साल का एक बेटा है। लवकेश अपने परिवार में पांच बहनों का इकलौता भाई था। पिता सुरेश चंद तोमर बेलनगंज क्षेत्र में काम करते हैं, जबकि लवकेश रात में गांव लौटकर परिवार के साथ रहता था।

घटना का क्रम
पुलिस जांच के अनुसार, गौरी पिछले पांच महीनों से चचेरे देवर सुंदर के साथ अवैध संबंध में थी। दोनों छिपकर मिलते थे, लेकिन लवकेश को इसकी जानकारी हो गई थी, जिससे घर में लगातार झगड़े हो रहे थे। 9 फरवरी की रात (वेलेंटाइन वीक के दौरान) सुंदर चोरी-छिपे घर आया। लवकेश की नींद खुल गई और उसने दोनों को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। पकड़े जाने के डर से गौरी और सुंदर ने मिलकर लवकेश को बेड पर लिटाया और तकिए से मुंह दबाकर तब तक दबाए रखा, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई।
इसके बाद दोनों ने साड़ी का फंदा बनाकर शव को पंखे से लटका दिया ताकि मामला आत्महत्या लगे। 10 फरवरी सुबह करीब 4 बजे गौरी ने लवकेश के पिता को फोन कर बताया कि बेटे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। परिजनों ने बहू की बात पर भरोसा किया और बिना पोस्टमार्टम या कानूनी औपचारिकता के उसी दिन अंतिम संस्कार कर दिया।
खुलासा कैसे हुआ?
हत्या के अगले दिन घर में हवन-पाठ चल रहा था, तब गौरी का व्यवहार संदिग्ध लगा। परिजनों को पता चला कि फंदे पर लटकते समय लवकेश के पैर जमीन छू रहे थे, जो आत्महत्या में असंभव था। परिवार की महिलाओं ने सख्त पूछताछ की और पुलिस बुलाने की बात कही, तो गौरी घबरा गई और पूरा जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस एक्शन
एकता थाना पुलिस ने सुरेश चंद की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास के अनुसार, गौरी और सुंदर तोमर को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच जारी है। पुलिस इसे सुनियोजित हत्या मान रही है।
समाज पर सवाल
यह मामला अवैध संबंधों की बढ़ती प्रवृत्ति और रिश्तों में संवाद की कमी को उजागर करता है। जहां पहले ऐसे मामले शहरों तक सीमित थे, अब गांवों में भी यह खतरनाक रूप ले रहा है। मोबाइल और गुप्त मुलाकातों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदनामी के डर से हत्या जैसा कदम उठाना समाज के लिए चेतावनी है। ईमानदारी और समय पर समाधान ही ऐसे अपराध रोक सकते हैं।