मथुरा।यमुना शुद्धिकरण को लेकर जिम्मेदार विभाग चाहे जितने दावे कर लें, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यमुना नदी में गिरते गंदे नाले आज भी खुलेआम प्रदूषण फैला रहे हैं। मथुरा के जयसिंहपुरा क्षेत्र में स्थित मसानी नाले का दूषित पानी सीधे यमुना में गिरता देखा गया, जिससे नदी का जल लगातार जहरीला होता जा रहा है।मसानी नाले के अलावा मथुरा से वृंदावन तक कई स्थानों पर नालों का गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के यमुना में छोड़ा जा रहा है। जहां-जहां नाले गिर रहे हैं, वहां यमुना का जल सबसे अधिक प्रदूषित नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, कई जगह यमुना किनारे मलबे और कचरे के ढेर भी पड़े हुए हैं, जो हालात को और बदतर बना रहे हैं।सरकार द्वारा यमुना शुद्धिकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति देखकर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर यह धनराशि कहां खर्च हुई। तस्वीरें और जमीनी हालात साफ तौर पर बता रहे हैं कि शुद्धिकरण की योजनाएं कागजों तक ही सीमित हैं।धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मथुरा क्षेत्र में यमुना की यह दुर्दशा न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती है। अब सवाल यह है कि यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने की जिम्मेदारी कब तय होगी और कब ठोस कार्रवाई दिखाई देगी।

राहुल गौड एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा में सक्रिय रहते हुए उन्होंने विभिन्न समाचार माध्यमों के लिए निष्पक्ष और प्रभावशाली रिपोर्टिंग की है। उनके कार्य में स्थानीय मुद्दों की गंभीर समझ और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता की झलक मिलती है।

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