लाहौर/अमृतसर। पंजाब के कपूरथला जिले के अमानिपुर गांव की रहने वाली 48 वर्षीय सरबजीत कौर (जिन्हें कुछ रिपोर्ट्स में 52 वर्ष बताया गया है) की कहानी ने भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। वह नवंबर 2025 में सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान गई थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। जांच में पता चला कि उन्होंने इस्लाम कबूल कर अपना नाम नूर फातिमा हुसैन (या नूर हुसैन) रख लिया और लाहौर के एक व्यक्ति नासिर हुसैन से निकाह कर लिया। अब उनके पाकिस्तान में रहने को लेकर सुरक्षा चिंताएं उठ रही हैं, और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया में कई मोड़ आ चुके हैं।
सरबजीत कौर का बैकग्राउंड और पाकिस्तान यात्रा
सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर 1,932 सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अटारी-वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान गई थीं। जत्था विभिन्न गुरुद्वारों के दर्शन के लिए गया था, लेकिन वापसी पर सरबजीत गायब हो गईं। कुल 1,922 श्रद्धालु ही लौटे। जांच से पता चला कि वह ननकाना साहिब गुरुद्वारा में नासिर हुसैन से मिलीं, जो 2016 से टिकटॉक के जरिए उनके संपर्क में थे। वहां से वह फुलारेवाली गांव, फिर फारूकाबाद और बुर्ज अटारी इलाके में चली गईं।
धर्म परिवर्तन और निकाह
पाकिस्तान पहुंचने के बाद सरबजीत ने इस्लाम अपनाया और अपना नाम नूर फातिमा हुसैन रख लिया। उनका निकाह नासिर हुसैन से शेखूपुरा की एक मस्जिद में हुआ, जहां मौलवी ने इसे वैध घोषित किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला स्वेच्छा से लिया गया था। निकाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ। हालांकि, भारत में उनके खिलाफ तीन धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं, जो कपूरथला के विभिन्न थानों में हैं। माना जा रहा है कि ये मामले उनके पाकिस्तान जाने का एक कारण हो सकते हैं।
गिरफ्तारी और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया
5 जनवरी 2026 को पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ब्यूरो की सूचना पर सरबजीत और नासिर हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया। पाकिस्तान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (PSGPC) के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा ने कहा कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी पर की गई। शुरू में डिपोर्टेशन की योजना बनी, और उन्हें वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ को सौंपने की तैयारी थी। लेकिन पाकिस्तान गृह मंत्रालय ने दस्तावेजों की समस्या और लाहौर हाईकोर्ट में लंबित केस का हवाला देकर इसे रोक दिया।
सुरक्षा चिंताएं और कोर्ट का हस्तक्षेप
सरबजीत की पाकिस्तान में मौजूदगी को लेकर सुरक्षा जोखिम बताए जा रहे हैं। पूर्व विधायक महेंद्र पाल सिंह ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि उनका रहना गैरकानूनी है और इससे सुरक्षा को खतरा है। वहीं, सरबजीत ने खुद कोर्ट में पाकिस्तानी नागरिकता की मांग की है, दावा किया कि भारत लौटने पर उनकी जान को खतरा है। कोर्ट ने पुलिस को उन्हें परेशान न करने का आदेश दिया था, लेकिन अब उनका मामला लंबित है। पाकिस्तानी गृह राज्य मंत्री मोहम्मद तलाल चौधरी ने कहा कि मानवीय आधार पर उनकी अपील पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल, वह लाहौर के दार-उल-अमान महिला शेल्टर होम में हैं, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच हो रही है और सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। उनके पति पुलिस हिरासत में हैं।
पाकिस्तान सरकार का रुख
पाकिस्तान ने सरबजीत की वीजा एक्सटेंशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, और एग्जिट परमिट जारी होने तक उन्हें डिपोर्ट नहीं किया जाएगा। मंत्री चौधरी ने कहा कि कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक वह शेल्टर होम में रहेंगी। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, सीमा पार संबंधों और सुरक्षा मुद्दों को लेकर संवेदनशील है। भारत और पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसियां उनके पुराने कनेक्शनों की जांच कर रही हैं।





