जिला नजर – पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट तेज हो गई है। ईरान द्वारा सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों पर हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा हालात बिगड़ गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सितंबर 2025 में हस्ताक्षरित सामरिक रक्षा समझौते की असली परीक्षा शुरू हो गई है। समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला होने पर दूसरे देश की सुरक्षा में सहयोग की प्रतिबद्धता है। इस संकट के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने 7 मार्च 2026 को रियाद पहुंचकर सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान से मुलाकात की। दोनों ने ईरानी हमलों और संयुक्त रक्षा कदमों पर विस्तार से चर्चा की।
पाकिस्तान अब सामरिक दुविधा के चक्रव्यूह में फंस गया है। लंबे समय से सऊदी अरब उसके घनिष्ठ सहयोगी रहा है। रियाद ने बार-बार आर्थिक मदद, तेल आपूर्ति और वित्तीय सहायता देकर इस्लामाबाद को संकट से उबारा है। लेकिन ईरान से पाकिस्तान की 900 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। सुरक्षा, ऊर्जा आयात और क्षेत्रीय संतुलन के कई साझा हित हैं। खुलकर सऊदी के पक्ष में उतरने से ईरान के साथ संबंध बिगड़ सकते हैं और सीमा पर तनाव बढ़ सकता है। विश्लेषक मानते हैं कि इस्लामाबाद अभी तक संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है।
आंतरिक चुनौतियां और भी गंभीर हैं। पाकिस्तान में सुन्नी और शिया समुदाय दोनों की बड़ी आबादी है। ईरान शिया बहुल देश है, जबकि सऊदी सुन्नी नेतृत्व वाला। फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका-इजराइल हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में शिया समुदाय ने भारी विरोध प्रदर्शन किए। गुस्साई भीड़ ने कराची और लाहौर में अमेरिकी मिशनों पर हमला बोल दिया। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 23 लोग मारे गए। अगर पाकिस्तान सऊदी के समर्थन में खुलकर उतरता है तो घरेलू सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता है।
सैन्य इतिहास भी पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है। भारत के साथ हुए युद्धों समेत किसी भी बड़े संघर्ष में उसे निर्णायक जीत नहीं मिली। ऐसे में सऊदी समर्थन में सीधा सैन्य हस्तक्षेप प्रतीकात्मक या सीमित सहयोग तक ही रह सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका, इजराइल और क्षेत्रीय महाशक्तियों की रणनीति तय करेगी। पाकिस्तान की भागीदारी ज्यादा गहरी नहीं होगी।
पाकिस्तान सऊदी के साथ खड़ा होने का संकेत दे रहा है, लेकिन ईरान के साथ संबंध और घरेलू संतुलन बनाए रखने की कोशिश भी जारी है। फील्ड मार्शल मुनीर की रियाद यात्रा इस रणनीति का हिस्सा है। फिर भी, अगर तनाव बढ़ा तो इस्लामाबाद को कठिन फैसला लेना पड़ेगा। क्षेत्रीय शांति और पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता दोनों दांव पर हैं।























