कागारौल/आगरा। क्या यही है ‘विकसित भारत’ का असली चेहरा? जहां करोड़ों की सरकारी योजनाओं में घटिया सामग्री डालकर जनता को ठगा जा रहा है! कागारौल और गढ़मुक्तेश्वर इलाके में चामुंडा देवी मंदिर से बासुजान तक बनी 3 किलोमीटर लंबी सड़क का हाल देखकर हर कोई हैरान है। महज एक महीने में यह सड़क उखड़ गई है, गड्ढों से भरी पड़ी है और गिट्टियां बाहर निकल आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवागमन अब नर्क से बदतर हो गया है – गाड़ियां फंस रही हैं, दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, और रोजमर्रा की जिंदगी ठप्प!
यह सड़क, जो हाल ही में सरकारी ठेकेदारों द्वारा बनाई गई थी, अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बन चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री इतनी घटिया थी कि बारिश की पहली बौछार में ही सब कुछ बिखर गया। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने पैसे बचाने के चक्कर में क्वालिटी से समझौता किया, और अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं। “यह सड़क नहीं, मौत का जाल है!” – एक स्थानीय किसान ने गुस्से में कहा। बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं, बुजुर्ग घर से निकलने में हिचकिचाते हैं, और व्यापारियों का कारोबार चौपट हो रहा है।
कांग्रेस का तीखा हमला: इस शर्मनाक हालात पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिंह सिकरवार ने सीधा मोर्चा संभाला। वे खुद मौके पर पहुंचे, सड़क की जांच की और अधिकारियों को लताड़ लगाई। “यह सरकारी लूट का खुला खेल है! अगर 48 घंटों में मरम्मत शुरू नहीं हुई, तो हम सड़क पर उतरेंगे और बड़ा आंदोलन करेंगे,” सिकरवार ने धमकी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री से जांच की मांग की और कहा कि अगर दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का गुस्सा फूट पड़ेगा। कांग्रेस ने इसे ‘मोदी सरकार की विफलता’ करार दिया और दावा किया कि ‘विकास’ के नाम पर सिर्फ जुमले चल रहे हैं।
यह इलाका पहले से ही सड़क समस्या से जूझ रहा है। पिछले साल भी इसी तरह की शिकायतें आई थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब सवाल उठ रहे हैं – क्या यह भ्रष्टाचार का बड़ा नेटवर्क है? स्थानीय प्रशासन चुप्पी साधे हुए है, लेकिन जनता में उबाल है। सोशल मीडिया पर #घटिया_निर्माण ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स फोटोज और वीडियोज शेयर कर सरकार को कोस रहे हैं।
हमारी अपील: अगर आप भी इस इलाके से हैं या ऐसी कोई घटना जानते हैं, तो हमें बताएं। क्या यही है ‘अमृतकाल’ का विकास?
रिपोर्ट – मु. इस्माइल खान





