लखनऊ|जिला नजर। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन एक असामान्य घटना घटी जब दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी। इस दौरान दो विधायकों के मोबाइल फोन बज उठे, जिस पर स्पीकर सतीश महाना बेहद नाराज हो गए। उन्होंने तुरंत सुरक्षा कर्मियों को बुलाकर दोनों विधायकों के फोन जब्त करवा लिए। इस घटना ने सदन की गरिमा और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के अनुसार, बजट सत्र के दौरान सदन में पूर्व विधायकों की स्मृति में मौन रखा जा रहा था। इसी बीच फतेहपुर सीकरी से भाजपा विधायक चौधरी बाबूलाल और एक अन्य विधायक के मोबाइल फोन की रिंगटोन सुनाई दी। स्पीकर महाना ने इसे सदन की मर्यादा का उल्लंघन मानते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिए कि फोन तुरंत जब्त किए जाएं।

यह घटना हाल के वर्षों में सदन में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर बने नियमों की याद दिलाती है। पहले भी स्पीकर महाना ने चेतावनी दी थी कि सदन की कार्यवाही के दौरान फोन बजने पर उन्हें जब्त किया जा सकता है। 2022 में एक समान घटना में उन्होंने सदस्यों को फोन स्विच ऑफ रखने की हिदायत दी थी। हालाँकि, इस बार कार्रवाई और सख्त थी, खासकर क्योंकि यह श्रद्धांजलि सभा के दौरान हुआ।
सदन के सूत्रों के मुताबिक, चौधरी बाबूलाल फतेहपुर सीकरी से भाजपा के विधायक हैं और वे सदन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। दूसरे विधायक का नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। घटना के बाद सदन में थोड़ी देर के लिए असहज माहौल रहा, लेकिन स्पीकर ने कार्यवाही को आगे बढ़ाया। विपक्षी सदस्यों ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे अनुशासन की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पहले से ही सख्त नियम हैं। 2023 में स्पीकर ने घोषणा की थी कि सदन में फोन ले जाना प्रतिबंधित होगा, लेकिन विधायकों की मांग पर इसे कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई। इस घटना से लगता है कि नियमों को और सख्ती से लागू किया जाएगा।
यह सत्र बजट प्रस्तुतिकरण के लिए महत्वपूर्ण है, और ऐसी घटनाएँ सदन की उत्पादकता पर असर डाल सकती हैं। स्पीकर महाना की यह कार्रवाई अन्य विधानसभाओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।





