फतेहाबाद/आगरा। श्रीहरि धाम के प्रख्यात कथाव्यास आचार्य श्री रामनजर जी महाराज (पूज्य श्रीहरि जी महाराज) प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम तट पर 32 दिवसीय कल्पवास साधना पूर्ण कर जब फतेहाबाद लौटे, तो श्रीहरि धाम में श्रद्धालुओं द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया। श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण इस स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
आचार्य श्री रामनजर जी महाराज ने अयोध्या के महंत श्री प्रशांत दास जी महाराज के सानिध्य में, संगम के एक नंबर पुल के पार शास्त्री नगर सेवा शिविर में कल्पवास साधना की। इस दौरान उन्होंने माघ मास की परंपराओं के अनुरूप नित्य संगम स्नान, एक समय भोजन, भजन-सत्संग एवं पूजा-पाठ कर साधना संपन्न की।
माघ मास का विशेष महत्व
आचार्य जी ने कहा—
“माघ मकर गत रवि जब होई,
तीरथ पतिहिं जाब सब कोई।”
रामायण, पुराणों एवं शास्त्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि माघ मास में प्रयागराज संगम तट पर नियमपूर्वक कल्पवास करने से साधक को एक कल्प तक स्वर्ग में वास का पुण्य फल प्राप्त होता है।
संत-महात्माओं के सानिध्य में मिली आत्मिक शांति
आचार्य श्री रामनजर जी महाराज ने बताया कि माघ मेले के दौरान उन्हें देशभर से आए तपस्वी संतों, आचार्यों, शंकराचार्यों, मंडलेश्वरों और महामंडलेश्वरों के दर्शन एवं सत्संग का सौभाग्य प्राप्त हुआ। लाखों कल्पवासी एवं सद्गृहस्थों के साथ रहकर भजन, साधना और पूजा-पाठ करने से उन्हें जीवन का अद्वितीय और परम आनंद मिला।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति प्राचीन भारतीय सनातन संस्कृति का साक्षात दर्शन करना चाहता है, तो उसे अवश्य माघ मेला प्रयागराज जाना चाहिए।
फतेहाबाद में श्रद्धालुओं ने किया आत्मीय स्वागत
आचार्य जी के फतेहाबाद आगमन पर श्रीहरि धाम में श्रद्धालुओं और अनुयायियों ने पुष्प वर्षा, जयघोष और आत्मीय अभिनंदन के साथ उनका स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।
- रिपोर्ट – सुशील गुप्ता





