संभल/हरिद्वार। उत्तर प्रदेश के संभल जिले की रहने वाली मुस्लिम युवती तमन्ना मलिक की शिव भक्ति की कहानी सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में चर्चा का विषय बनी हुई है। तमन्ना, जो एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन भगवान शिव की परम भक्त हैं, बुर्का पहनकर हरिद्वार की हर की पैड़ी से गंगा जल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकली हैं। उनका उद्देश्य महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर संभल के क्षेमनाथ शिव मंदिर में जलाभिषेक करना है। इस यात्रा के दौरान विभिन्न शहरों और कस्बों में उनका भव्य स्वागत किया जा रहा है, जो सांप्रदायिक सद्भाव की एक मिसाल पेश कर रहा है।
तमन्ना मलिक संभल जिले की निवासी हैं और उनकी शादी हिंदू युवक अमन त्यागी से हुई है। उनके दो बच्चे भी हैं। परिवार के समर्थन से उन्होंने यह यात्रा शुरू की है। हरिद्वार से संभल तक की यह लगभग 171 किलोमीटर की पैदल यात्रा है, जिसमें वे अन्य कांवड़ियों के साथ शामिल हैं। तमन्ना ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “मैं भगवान शिव की भक्त हूं और परिवार के साथ मिलकर यह यात्रा कर रही हूं। मेरी आस्था किसी धर्म की सीमा में नहीं बंधी है।”
यात्रा के दौरान तमन्ना का विभिन्न स्थानों पर जोरदार स्वागत हो रहा है। बिजनौर जिले के नूरपुर, फीना और रतनगढ़ में स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने फूल बरसाकर उनका अभिनंदन किया। अमरोहा जिले के नौगांवा सदात क्षेत्र में भी श्रद्धालुओं की भीड़ ने उनका स्वागत किया, जहां पुलिस सुरक्षा के बीच उन्हें आगे बढ़ाया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि लोग ‘बम बम भोले’ के जयकारों के साथ तमन्ना की सराहना कर रहे हैं।
प्रशासन ने यात्रा के लिए यातायात और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।
महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी को मनाई जाएगी, और तमन्ना की योजना है कि वे संभल पहुंचकर क्षेमनाथ शिव मंदिर में गंगा जल से भगवान शिव का अभिषेक करेंगी। कांवड़ यात्रा शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, जिसमें श्रद्धालु गंगा से पवित्र जल लाकर शिव मंदिरों में चढ़ाते हैं। तमन्ना की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक है, बल्कि धार्मिक सद्भाव और एकता का संदेश भी दे रही है। सोशल मीडिया पर इस घटना को ‘इंसानियत और इमान की खूबसूरत तस्वीर’ बताया जा रहा है।
इस तरह की घटनाएं भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उदाहरण समाज में आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा देते हैं। तमन्ना की कहानी ने न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, और यह साबित करती है कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती।


