मुरैना: चंबल अभयारण्य में हाल ही में हुई गिद्धों की गणना ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। अभयारण्य में कुल 149 गिद्ध दर्ज किए गए हैं, जो भारत में गिद्धों की गिरती संख्या के बीच एक राहत भरी खबर है। चंबल क्षेत्र अब गिद्धों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त आवास के रूप में उभर रहा है।
गिद्धों की प्रजातिवार संख्या (हालिया गणना के अनुसार):
इजिप्सियन वल्चर (सफेद गिद्ध / Egyptian Vulture) – 111
सफेद पीठ वाला काला गिद्ध (White-rumped Vulture) – 05
देशी गिद्ध (Indian Vulture / Long-billed Vulture) – 33
कुल गिद्ध – 149
यह संख्या चंबल अभयारण्य के संरक्षण प्रयासों की सफलता को दर्शाती है, जहां कम प्रदूषण, ऊँची चट्टानें (क्लिफ्स) और मृत पशुओं की उपलब्धता (प्राकृतिक भोजन) गिद्धों के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करती है।
चंबल अभयारण्य का महत्व:
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य (National Chambal Sanctuary) उत्तर भारत में गिद्धों सहित कई दुर्लभ पक्षियों का प्रमुख संरक्षण क्षेत्र है।
यह घड़ियाल (Gharial), गंगा नदी डॉल्फिन, विभिन्न कछुओं और 300+ पक्षी प्रजातियों का घर है।
गिद्धों के लिए यहां नियमित मॉनिटरिंग, वल्चर सफाई ज़ोन और संरक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में गिद्ध मृत पशुओं को जल्दी साफ करके बीमारियों (जैसे रेबीज, एंथ्रेक्स) के फैलाव को रोकते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं।
भारत में गिद्धों की स्थिति:
पिछले कुछ दशकों में भारत में गिद्धों की आबादी 95%+ तक गिर चुकी थी, मुख्य रूप से डाइक्लोफेनाक (पशुओं के दर्द निवारक दवा) के कारण, जो गिद्धों के लिए घातक साबित हुई। 2006 में डाइक्लोफेनाक पर प्रतिबंध के बाद रिकवरी शुरू हुई है। चंबल जैसे क्षेत्र अब गिद्धों की आबादी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालिया वर्षों में मध्य प्रदेश (जिसमें चंबल का हिस्सा है) में गिद्धों की कुल संख्या 12,000+ तक पहुंची है, जो संरक्षण की सफलता दिखाती है।
- रिपोर्ट – जिला ब्यूरो चीफ मुरैना मुहम्मद इसरार खान

