जीएलए विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का प्रेरक संबोधन

मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में आयोजित भव्य 14वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने छात्रों को प्रेरणादायी संबोधन देते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में है और आने वाले वर्षों में वह देश को नई बुलंदियों तक पहुंचाएंगे।मंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर आयोजित यह दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार है। उन्होंने गीता के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब जीवन में संशय हो या मार्ग स्पष्ट न दिखे, तब “कर्तव्य पालन” मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म होता है और साहस से आगे बढ़ने पर सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है।उन्होंने कहा कि “आज आप सब अपने जीवन की नई यात्रा पर निकल रहे हैं। यह डिग्री केवल आपकी शिक्षा का प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी का प्रतीक है।”
मंत्री ने युवाओं से जीवन भर सीखते रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि कैंपस में मिली शिक्षा तो प्रारंभिक अध्याय थी, अब पूरी दुनिया उनका नया कक्षा–कक्ष होगा, जहाँ अनुभव उनके सबसे बड़े शिक्षक बनेंगे।श्री चौधरी ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर अपनी क्षमता साबित कर रहा है। 5G और भविष्य की 6G तकनीक का स्वदेश में विकास कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की तकनीकी स्वतंत्रता की बड़ी छलांग है। उन्होंने कहा कि भारत अब 2G–3G–4G के दौर जैसा निर्भर देश नहीं, बल्कि डिजिटल नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है।उन्होंने बताया कि आज देश में 1.6 लाख से अधिक स्टार्टअप्स कार्यरत हैं और भारत दुनिया का अग्रणी स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया 2.0 जैसी योजनाओं ने लाखों युवाओं, महिलाओं और नव उद्यमियों को नए अवसर दिए हैं। उन्होंने कहा कि “अगर आपके पास आइडिया, कौशल और मेहनत की इच्छा है तो आपको अवसरों की कभी कमी नहीं होगी।”समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि युवाओं को अपने कौशल को लगातार अद्यतन करना चाहिए, क्योंकि बदलते समय में सीखते रहने वाला ही सफल हो पाता है। जीवन में आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियाँ ही चरित्र निर्माण करती हैं और वही सफलता के आधार बनती हैं।श्री चौधरी ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, माता–पिता और अभिभावकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि दीक्षांत दिवस पर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हर छात्र का दायित्व है। उन्होंने गुरुकुल परंपरा के ‘समावर्तन संस्कार’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वह क्षण है जब विद्यार्थी सीखकर समाज में लौटते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।अंत में उन्होंने गीता के एक प्रेरक संदेश के साथ अपने विचार समाप्त किए “मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। जैसा वह विश्वास करता है, वैसा ही वह बन जाता है।”उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उत्कृष्टता के उच्चतम शिखरों को प्राप्त करने की शुभकामनाएं दीं।

राहुल गौड एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा में सक्रिय रहते हुए उन्होंने विभिन्न समाचार माध्यमों के लिए निष्पक्ष और प्रभावशाली रिपोर्टिंग की है। उनके कार्य में स्थानीय मुद्दों की गंभीर समझ और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता की झलक मिलती है।

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