गड़वार/बलिया | जिला नजर |संवाददाता
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी से लागू किए गए नए नियमों को लेकर विरोध की आग अब और तेज़ होती जा रही है। पहले से चल रहे असंतोष के बीच अब सामान्य वर्ग के संगठनों ने भी खुलकर मोर्चा खोल दिया है, जिससे मामला और गंभीर रूप लेता नजर आ रहा है।
बुधवार को गड़वार क्षेत्र के त्रिकालपुर गांव में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनिल सिंह और ब्राह्मण स्वयंसेवक संघ के प्रदेश महासचिव राजेश मिश्रा ने संयुक्त बयान जारी कर यूजीसी के नियमों पर कड़ा ऐतराज जताया।
नेताओं का आरोप है कि नए नियम शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देंगे और कॉलेज-यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक माहौल बुरी तरह प्रभावित होगा।
संयुक्त बयान में कहा गया कि सरकार द्वारा बिना किसी ठोस आधार के यह दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है कि शोषण केवल सवर्ण समाज द्वारा ही किया जाता रहा है, जो पूरी तरह अनुचित और दुर्भावनापूर्ण है।
संगठनों ने आरोप लगाया कि यह बिल सरकार की सवर्ण-विरोधी मानसिकता को उजागर करता है, जिसे समाज किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा।
नेताओं ने केंद्र सरकार से तत्काल नियमों में संशोधन की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते इस पर पुनर्विचार नहीं किया, तो देशभर में सवर्ण समाज का आंदोलन और उग्र होगा, जिसका राजनीतिक खामियाजा केंद्र सरकार को भुगतना पड़ेगा।
इस मौके पर आनंद सिंह, ओम प्रकाश पाण्डेय, मृत्युंजय सिंह, पंकज उपाध्याय सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
संगठनों ने साफ संकेत दिए कि यह विरोध केवल बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में इसे व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा।

