नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन, सम्मान और प्रोटोकॉल को लेकर लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टता को खत्म करते हुए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय (MHA) के नए आदेश (जो 28 जनवरी 2026 को जारी हुआ और 11 फरवरी को मीडिया में प्रमुखता से आया) के अनुसार, अब प्रमुख सरकारी समारोहों, ध्वजारोहण कार्यक्रमों, राष्ट्रपति/राज्यपालों के आगमन और अन्य आधिकारिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ का गायन या वादन अनिवार्य होगा।
मुख्य बदलाव और नियम:
- क्रम: यदि किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ (राष्ट्रगीत) और ‘जन गण मन’ (राष्ट्रगान) दोनों बजाए या गाए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रगान। यह परंपरा को औपचारिक रूप देता है।
- पूर्ण संस्करण अनिवार्य: आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण (बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की मूल रचना के सभी 6 छंद/श्लोक) बजाया या गाया जाएगा। इसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित की गई है।
- सम्मान का तरीका: गायन या वादन के दौरान सभी उपस्थित लोगों को सावधान (Attention) मुद्रा में खड़े होकर सम्मान प्रकट करना अनिवार्य होगा – ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान के समय होता है।
- बैंड प्रस्तुति: यदि बैंड द्वारा वादन किया जा रहा है, तो पहले ढोल की थाप या बिगुल बजाकर सभा को सचेत किया जाएगा।
- स्कूलों और सरकारी संस्थानों में: स्कूल असेंबली या अन्य औपचारिक आयोजनों में भी पूर्ण संस्करण का गायन अनिवार्य होगा, और पढ़ाई राष्ट्रगीत के बाद शुरू होगी।
- सिनेमा हॉल को छूट: व्यावहारिक कारणों से सिनेमा हॉल या फिल्मों में यदि ‘वंदे मातरम’ साउंडट्रैक या दृश्य के हिस्से के रूप में बजता है, तो दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। सरकार का मानना है कि मनोरंजन के बीच बार-बार खड़े होने से अव्यवस्था हो सकती है।





