🔹रूस की रोसनेफ्ट समर्थित निजी कंपनी ने ग्लोबल कच्चे तेल की 50% उछाल का असर पास-ऑन किया;
🔹सरकारी कंपनियां अभी चुप, कई शहरों में पंपों पर लंबी कतारें
जिला नजर/डेस्क | 27 मार्च -2026 | शुक्रवार ________________________________
नई दिल्ली | पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग के बीच भारत में ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर नायरा एनर्जी ने गुरुवार (26 मार्च 2026) को पेट्रोल की कीमत में ₹5 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। कुछ राज्यों में VAT के कारण पेट्रोल की प्रभावी बढ़ोतरी ₹5.30 प्रति लीटर तक पहुंच गई।
यह बढ़ोतरी मध्य पूर्व संकट के बाद निजी क्षेत्र की ओर से पहली बड़ी कीमत समायोजन है। सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL और HPCL) अभी सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर स्थिर हैं, हालांकि उन्होंने प्रीमियम वेरिएंट में थोड़ी बढ़ोतरी की थी।
कई शहरों में अफरा-तफरी और लंबी कतारें
नायरा के पंपों पर कीमत बढ़ने के तुरंत बाद कई शहरों (जैसे हैदराबाद, असम और अन्य जगहों) में पैनिक बाइंग शुरू हो गई। उपभोक्ता आगे और महंगाई या स्टॉक की कमी के डर से ईंधन भरवा रहे हैं। कुछ पंपों पर “स्टॉक खत्म” के बोर्ड भी लग गए। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं से पैनिक बाइंग न करने की अपील की है।
नायरा एनर्जी क्या है और क्यों बढ़ाए दाम?
नायरा एनर्जी भारत की सबसे बड़ी निजी तेल रिफाइनिंग और ईंधन मार्केटिंग कंपनी है। गुजरात के वडीनार में स्थित इसकी 20 मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता वाली रिफाइनरी देश की दूसरी सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी है। कंपनी देशभर में लगभग 6,900-7,000 पेट्रोल पंप संचालित करती है।
कंपनी ने बढ़ोतरी का कारण ग्लोबल कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल बताया। फरवरी के अंत से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 50% बढ़ चुकी हैं (कुछ समय $100-119 प्रति बैरल तक पहुंचीं)। मध्य पूर्व युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण रूट पर आपूर्ति प्रभावित हुई है।
नायरा निजी कंपनी होने के कारण सरकारी कंपनियों जैसी सब्सिडी या मुआवजे का लाभ नहीं ले पाती। बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट (कच्चा तेल) को उपभोक्ताओं पर आंशिक रूप से पास-ऑन करना पड़ा।
नायरा एनर्जी का मालिक कौन? रूस की मजबूत पकड़
नायरा एनर्जी (पहले Essar Oil) में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) के पास है — लगभग 49.13%। इसी के आसपास की हिस्सेदारी केसानी एंटरप्राइजेज कंसोर्टियम (रूसी निवेश समूह UCP और Mareterra Group) के पास है।
इसी वजह से नायरा को अक्सर “Russia-backed Indian oil company” कहा जाता है। 2025 में रोसनेफ्ट ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश की थी, लेकिन अभी तक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
रूस को फायदा?
अप्रत्यक्ष रूप से हां। रोसनेफ्ट नायरा की बढ़ी हुई बिक्री और मार्जिन से प्रॉफिट शेयर पाएगी। साथ ही, वैश्विक स्तर पर ऊंची कच्चे तेल की कीमतें रूस (दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक) को फायदा पहुंचाती हैं, भले ही पश्चिमी प्रतिबंध हों। हालांकि, नायरा को भी कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमत चुकानी पड़ रही है, इसलिए पूरा फायदा नहीं।
आगे क्या?
• सरकारी कंपनियां अभी कीमतें नहीं बढ़ा रही हैं, लेकिन अगर कच्चा तेल $110+ पर बना रहा तो दबाव बढ़ सकता है।
• नायरा अपनी वडीनार रिफाइनरी को अप्रैल से 35 दिन के मेंटेनेंस शटडाउन की योजना बना रही है, जिससे देश की रिफाइनिंग क्षमता पर थोड़ा असर पड़ सकता है (करीब 8%)। कंपनी ने स्टॉक पर्याप्त होने का आश्वासन दिया है।
उपभोक्ताओं को सलाह: कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अनावश्यक स्टोरेज से बचें और केवल जरूरत के अनुसार ईंधन भरवाएं।























