मुंबई/महाराष्ट्र: नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम, वर्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष (100 Years of Sangh Journey – New Horizons) के उपलक्ष्य में दो दिवसीय व्याख्यानमाला (7-8 फरवरी 2026) आयोजित की गई। कार्यक्रम के दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ की प्रकृति, उद्देश्य और भविष्य पर गहन प्रकाश डाला। उन्होंने दूर से देखने पर होने वाली गलतफहमियों को दूर करते हुए कहा कि संघ किसी एक विशेष पहचान में सीमित नहीं है।
भागवत ने कहा, “संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं लेकिन आरएसएस पैरामिलिट्री ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। स्वयंसेवक लाठी-काठी सीखते हैं, लेकिन यह अखिल भारतीय अखाड़ा नहीं है। घोष की धुन बजती है, संगीत होता है, लेकिन संघ संगीतशाला नहीं है। स्वयंसेवक राजनीति में भी हैं, लेकिन संघ राजनीतिक पार्टी नहीं है।”
उन्होंने जोर दिया कि संघ का काम संघ के लिए नहीं, पूरे देश और भारतवर्ष के लिए है। “संघ किसी के विरोध में, प्रतिक्रिया में या कंपटीशन में नहीं चला है। हमारा काम बिना विरोध किए करना है। संघ को पॉपुलैरिटी नहीं चाहिए, पावर नहीं चाहिए।”
संघ को समझने का तरीका भागवत ने बार-बार दोहराया, “संघ को देखना है तो संघ की शाखा देखिए, संघ के कार्यकर्ताओं के घर-परिवार देखिए।” संघ समाज में अलग संगठन या प्रेशर ग्रुप नहीं खड़ा करना चाहता। देश का भाग्य समाज के एकजुट होने से बदलता है। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, चीन आदि देशों के उत्थान-पतन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले समाज तैयार होता है, फिर उत्थान होता है।
हिंदू पहचान पर विचार भागवत ने कहा, “भारत में हिंदू ही हैं और कोई नहीं। हिंदू रिलिजन या पूजा-पाठ का नाम नहीं, बल्कि एक विश्लेषण है। हिंदू शब्द बाहर से आया, लेकिन सनातन स्वभाव भारत का है।” उन्होंने चार तरह के हिंदू बताए:
- गर्व से कहो हम हिंदू हैं।
- हां हम हिंदू हैं।
- जोर से मत बोलो हम हिंदू हैं।
- जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं।
उन्होंने कहा कि सबका सम्मान करो, अपनी श्रद्धा पर पक्के रहो, मिलजुल कर रहो। भारत धर्म प्राण है – सबको साथ लेकर चलना है, किसी को छोड़ना नहीं। “धर्मनिरपेक्षता गलत शब्द है, पंथनिरपेक्षता होना चाहिए। भारत के मुसलमान और ईसाई बाकी दुनिया जैसे नहीं हैं।”
BJP और संघ का रिश्ता भागवत ने स्पष्ट किया, “बीजेपी संघ की पार्टी नहीं है, संघ के स्वयंसेवक उसमें हैं।” संघ का काम सम्पूर्ण समाज को संगठित करना है। विरोध करने वाले भी समाज का हिस्सा हैं, उन्हें भी संगठित करना है।
अन्य प्रमुख बिंदु
- फिर से गुलामी नहीं आएगी, लेकिन समाज में एकता की कमी है।
- सनातन स्वभाव नहीं बदलता – सब अपने हैं, ज्ञान दुनिया को देना चाहिए।
- अकेले रहने में कोई अनुशासन नहीं, लेकिन सबके साथ रहने में अनुशासन है।
यह कार्यक्रम RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर महत्वपूर्ण था, जहां सलमान खान, सुभाष घई जैसे बॉलीवुड सितारे भी मौजूद रहे। भागवत का संबोधन संघ की विचारधारा को स्पष्ट करने वाला रहा, जो सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित है।





