आगरा। बंदरों की दहशत ने एक और परिवार उजाड़ दिया। थाना शाहगंज क्षेत्र के वेस्ट अर्जुन नगर में आज सुबह विरमा देवी छत पर कपड़े उतारने गई थीं। अचानक 15-20 बंदरों के झुंड ने उन पर झपट्टा मार दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बंदरों के हमले से महिला का संतुलन बिगड़ गया और वे तीसरी मंजिल से नीचे गिर पड़ीं। गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
परिवार में कोहराम मच गया है। पति चरण सिंह और अन्य सदस्य सदमे में हैं। मोहल्ले में शोक और गुस्से का माहौल है। लोग चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं – “बंदरों का आतंक कब तक चलेगा? प्रशासन सो रहा है!”

बंदरों का लंबे समय से आतंक स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वेस्ट अर्जुन नगर में बंदरों की समस्या सालों से बनी हुई है।
- छतों पर कपड़े सुखाना, काम करना या यहां तक कि घर से बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है।
- बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित।
- करीब एक साल पहले इसी इलाके में एक अन्य महिला को बंदरों ने छत से गिरा दिया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुई थीं। लेकिन प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान नहीं किया।
- लोग कई बार नगर निगम, वन विभाग और पुलिस में शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लोगों की मांगें हादसे के बाद क्षेत्रवासियों ने प्रदर्शन की धमकी दी है। मुख्य मांगें:
- बंदरों को तुरंत पकड़कर जंगल में स्थानांतरित किया जाए।
- इलाके में नियमित गश्त और बंदर-रोकथाम टीम तैनात हो।
- प्रभावित परिवार को मुआवजा और सुरक्षा दी जाए।
- प्रशासन से लिखित आश्वासन कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
प्रशासन की नाकामी? यह घटना आगरा में बंदरों की समस्या की गंभीरता को दर्शाती है। शहर के कई इलाकों (जैसे ताजगंज, शाहगंज, सिकंदरा) में बंदरों की संख्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कचरा प्रबंधन की कमी, फल-सब्जी बाजारों से निकटता और लोगों द्वारा बंदरों को खिलाने से समस्या बढ़ी है। वन विभाग की तरफ से समय-समय पर बंदरों को कैद कर स्थानांतरित करने की कोशिश होती है, लेकिन पर्याप्त नहीं।





