अलीगढ़: पश्चिमी उत्तर प्रदेश अब लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के निशाने पर है। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पिछले कुछ दिनों में आए खुलासों के बाद पश्चिमी यूपी के अपराधियों का डेटाबेस तैयार करना शुरू कर दिया है। इसमें उन शूटरों और उनके करीबियों का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है जो दिल्ली-NCR और अन्य राज्यों में लॉरेंस गिरोह के लिए काम कर रहे हैं। डेटाबेस तैयार होने के बाद इन पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की योजना है।
STF के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पंजाब-राजस्थान में सबसे सक्रिय यह गिरोह अब पश्चिमी यूपी के जिलों (आगरा, अलीगढ़, हापुड़ आदि) में भी अपनी जड़ें जमा रहा है। हाल के मामलों से यह साफ हो गया है कि स्थानीय अपराधी दिल्ली-NCR के रास्ते इस गिरोह से जुड़ रहे हैं।
ताजा खुलासे और गिरफ्तारियां
- आगरा कनेक्शन: हाल ही में मुंबई में फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी के जूहू स्थित आवास पर फायरिंग का मामला सामने आया। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के सदस्य शुभम लोंकर ने इसकी जिम्मेदारी ली। मुंबई क्राइम ब्रांच और यूपी STF की संयुक्त कार्रवाई में 7 आरोपी (जिनमें मुख्य शूटर दीपक रमेशचंद्र शर्मा) पकड़े गए। अधिकांश आरोपी आगरा के बीजौली गांव (बाह क्षेत्र) के हैं। कुछ गौतम बुद्ध नगर और इटावा से भी हैं। जांच में पता चला कि शुभम लोंकर ने 50 हजार रुपये एडवांस दिए थे। कुल 12 आरोपी अब हिरासत में हैं।
- हापुड़ में एनकाउंटर: पिछले साल हापुड़ में लॉरेंस गिरोह के शूटर नवीन कुमार (37) को STF और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने एनकाउंटर में मार गिराया। वह हाशिम बाबा के साथ मिलकर काम करता था और 20+ मामलों में वांटेड था।
- अलीगढ़ पर फोकस: STF की टीमें अलीगढ़ में भी सुराग तलाश रही हैं। यहां पुराने मुनीर गैंग के सदस्यों का लिंक तलाशा जा रहा है। मुनीर के जेल जाने और बाद में मारे जाने के बाद उसका गैंग तितर-बितर हो गया, लेकिन कई सदस्य दिल्ली में सक्रिय रहे। अब जांच में देखा जा रहा है कि क्या ये लॉरेंस गिरोह से जुड़ गए हैं।
प्रमुख नाम और संदेह
- एएमयू शिक्षक दानिश राव हत्या केस: फरार 1-1 लाख इनामी नौशा बरला के शूटर भाई जुबैर, यासिर और फहद का नाम लॉरेंस गिरोह से जुड़ने के संदेह में है। ये दिल्ली में सक्रिय हैं।
- आशुतोष मिश्रा: तिहाड़ जेल में बंद निरुद्ध मुनीर का राइट हैंड। STF इन सभी के करीबियों और वर्तमान स्थिति की जांच कर रही है। कुछ अलीगढ़ में भी सक्रिय हैं।
डीआईजी रेंज प्रभाकर चौधरी ने कहा: “एसटीएफ समय-समय पर संगठित अपराध पर ड्राइव चलाती है। लॉरेंस गिरोह से जुड़े अपराधियों पर काम हो रहा है, लेकिन अभी किसी ने हमसे संपर्क नहीं किया। अगर मांगा जाएगा तो मदद करेंगे। हमारी टीमें शूटरों की धरपकड़ में लगी हैं। जेल में बंदों की निगरानी जारी है।”





