आगरा: हिमाचल प्रदेश की मंडी से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के बहुचर्चित बयानों से जुड़े मामले में आज आगरा की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में महत्वपूर्ण विकास हुआ। कंगना ने कोर्ट में स्पष्ट रूप से स्वीकार कर लिया कि विवादित बयान उनके द्वारा ही दिए गए थे। पुलिस की जांच आख्या को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर ले लिया है, और अब मामले में विस्तृत बहस के लिए 13 फरवरी 2026 की तारीख तय कर दी गई है।
थाना न्यू आगरा के प्रभारी निरीक्षक राजीव त्यागी द्वारा तैयार की गई आख्या आज उप निरीक्षक सुबोध कुमार सिंह ने कोर्ट में पेश की। यह आख्या भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 225 के तहत कोर्ट के निर्देश पर जांच के आधार पर दाखिल हुई। पुलिस रिपोर्ट में कंगना के बयानों को विस्तार से दर्ज किया गया है।
कंगना ने क्या स्वीकार किया?
- पहला बयान (26 अगस्त 2024, एक्स पर ट्वीट):
- कंगना ने माना कि 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान हत्याएं और बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही थीं। उन्होंने कहा कि अगर देश का नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो भारत में बांग्लादेश जैसे हालात बन सकते थे। इस ट्वीट के समर्थन में उन्होंने एबीपी न्यूज (11 सितंबर 2020) के उस रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें महाराष्ट्र साइबर सेल ने किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तान समर्थक नेटवर्क के खुलासे की बात कही थी।
- दूसरा बयान (16 नवंबर 2021, इंस्टाग्राम पोस्ट):
- कंगना ने स्वीकार किया कि उन्होंने कहा था – 1947 में मिली आजादी “भीख में मिली आजादी” थी, और उन्हें असली आजादी का अनुभव 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद हुआ। उन्होंने सफाई दी कि यह टिप्पणी अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संदर्भ में थी, किसी व्यक्ति, वर्ग या समुदाय का अपमान करने का इरादा नहीं था। 1857 से शुरू हुई आजादी की लड़ाई को अंग्रेजों ने दबाया, और 2014 के बाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अनुभव हुआ।
कंगना ने कहा कि उनके बयानों की गलत व्याख्या की गई और संदर्भ से हटाकर पेश किया गया। पुलिस आख्या में इन सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है।
सुनवाई का माहौल:
आज कंगना की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सुधा प्रधान, स्थानीय वकील विवेक शर्मा सहित कई वकील मौजूद थे। वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के नेतृत्व में सुखबीर सिंह चौहान, राजीव कुमार सिंह, बीएस फौजदार, प्रीति कुमारी समेत कई वकील थे। हालांकि, कोर्ट ने आज किसी भी पक्ष की दलीलें नहीं सुनीं और सीधे 13 फरवरी को बहस के लिए तारीख दी।
मामले की पृष्ठभूमि:
यह प्रकरण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता vs सामाजिक/राष्ट्रीय भावनाओं के अपमान से जुड़ा है। वादी पक्ष (अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा) ने किसानों और महात्मा गांधी से जुड़े कथित अपमान पर राष्ट्रद्रोह जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज करने की मांग की थी। अब कंगना की स्वीकारोक्ति से मामला और संवेदनशील हो गया है। 13 फरवरी की सुनवाई में तय होगा कि ये बयान कानूनी कसौटी पर टिकते हैं या नहीं।





