2 026 में भारत वैश्विक पटल पर एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है, जहां आर्थिक गतिशीलता, कूटनीतिक लचीलापन और तकनीकी नवाचार इसकी भूमिका को परिभाषित कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के अनुसार, भारत 2026 में वैश्विक विकास हिस्सेदारी में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनेगा, जिससे दक्षिण एशिया को वैश्विक विकास का केंद्र बनाया जा रहा है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की रिपोर्ट भी इस गति को बरकरार रखने की भविष्यवाणी करती है, जहां भारत की GDP वृद्धि दर 7% से ऊपर रहने की संभावना है। यह न केवल आर्थिक सुधारों (जैसे मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया) का परिणाम है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की एकीकरण की रणनीति का भी।
कूटनीतिक मोर्चे पर, भारत की विदेश नीति अब कठोर गठबंधनों से हटकर हित-आधारित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की ओर अग्रसर है। ग्लोबल साउथ के नेता के रूप में, भारत अफ्रीका और एशिया में अपना प्रभाव मजबूत कर रहा है, हालांकि चीन की तुलना में अभी यह सीमित है। 2026 में प्राथमिकताएं व्यापार विस्तार, कनेक्टिविटी निर्माण, ऊर्जा सहयोग और रक्षा आदान-प्रदान पर केंद्रित हैं। QUAD और BRICS जैसे मंचों के माध्यम से, भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित कर रहा है, जबकि G20 और UN में विकासशील देशों की आवाज बुलंद कर रहा है। फरवरी 2026 में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट, जहां वैश्विक नेता और दिग्गज जुटे, भारत की AI मिशन ($1 बिलियन से अधिक) को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है।
हालांकि, चुनौतियां कम नहीं हैं। सुरक्षा दृष्टि से, नई शक्ति नियमों के बीच भारत को सीमा विवादों (चीन, पाकिस्तान) और साइबर खतरों से जूझना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक असमानता जैसे मुद्दों पर भारत की भूमिका राष्ट्रीय हितों की रक्षा के साथ वैश्विक जिम्मेदारियों को संतुलित करने की मांग करती है।
कुल मिलाकर, 2026 भारत के लिए ‘उदय का वर्ष’ है, जहां यह न केवल आर्थिक इंजन बनेगा, बल्कि बहुपक्षीयता को मजबूत कर शांति और समृद्धि का पुल भी। यदि भारत अपनी रणनीतिक पसंदों को सावधानी से चुनता है, तो यह वैश्विक व्यवस्था का नया केंद्र बन सकता है।
• सन्त कुमार























