आगरा: जिले की स्पेशल कोर्ट (एमपी-एमएलए) में भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत से जुड़े विवादित मामले में बुधवार को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। यह मामला किसान आंदोलन (2020-21) के दौरान कंगना रनौत द्वारा कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है, जिसमें किसानों, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और अन्य पर टिप्पणियां शामिल हैं। वादी पक्ष ने पुलिस की आख्या (रिपोर्ट) पर गंभीर आपत्तियां जताईं।
मुख्य बिंदु
- सुनवाई की जगह और जज: स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए, न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में हुई।
- वादी पक्ष की दलीलें: वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान और राजवीर सिंह ने लंबी बहस की। उन्होंने कहा कि:
- पुलिस ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन नहीं किया और पूर्ववत (पुरानी वाली) आख्या ही दोबारा पेश कर दी।
- कंगना रनौत का व्यक्तिगत बयान पुलिस द्वारा दर्ज नहीं किया गया, जो कोर्ट के स्पष्ट आदेश का उल्लंघन है।
- कंगना की ओर से उनकी अधिवक्ता अनसूया चौधरी द्वारा दिया गया बयान कानूनी रूप से असंगत है।
- मुख्य सवाल: अधिवक्ताओं ने कोर्ट से पूछा – क्या कानून किसी अधिवक्ता को अनुमति देता है कि वह अपने मुवक्किल (क्लाइंट) की जगह स्वयं बयान दर्ज करा दे?
- कोर्ट की प्रतिक्रिया: जज ने इस सवाल पर सहमति जताई और वादी पक्ष से संबंधित कानूनी रूलिंग्स (प्रावधान), नजीरें (केस लॉ) और प्रेसिडेंट्स प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
- अगली तारीख: विस्तृत बहस और आगे की कार्यवाही के लिए 6 मार्च 2026 तय की गई।
मामले का बैकग्राउंड (संक्षेप में):
यह केस 11 सितंबर 2024 को वादी (वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा) द्वारा दायर किया गया था। आरोप हैं कि कंगना ने किसान आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया/साक्षात्कार में किसानों पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जिसे देशद्रोह और राष्ट्र अपमान की धाराओं में चुनौती दी गई। न्यू आगरा पुलिस ने पहले रिपोर्ट पेश की थी (जनवरी 2026 में बहस के लिए 13 फरवरी तय हुई थी), लेकिन वादी पक्ष पुलिस की जांच और आख्या पर बार-बार सवाल उठा रहा है।
सुनवाई में शामिल अन्य अधिवक्ता:
वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा के साथ बी.एस. फौजदार, आई.डी. श्रीवास्तव, कुमारी प्रीति, कुमारी तान्या जैन सहित कई अधिवक्ता मौजूद थे।
यह मामला राजनीतिक और कानूनी रूप से काफी चर्चित है, क्योंकि कंगना एक सांसद होने के साथ-साथ सेलिब्रिटी भी हैं। अगली सुनवाई में कानूनी नजीरों के आधार पर फैसला निर्णायक हो सकता है।

