आगरा। ज्ञान की लौ जब गणना से मिल जाए, तो अणु-अणु में नए रहस्य खिल उठते हैं। विज्ञान और बुद्धि का यह नव संवाद रसायन विज्ञान के भविष्य का रसायन रच रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) अब रसायन विज्ञान में क्रांतिकारी शक्ति बन चुकी है, जिसने अनुसंधान, दवा खोज, सामग्री विकास और शिक्षा को पूरी तरह बदल दिया है।
मशीन लर्निंग से तेज़ हुआ अनुसंधान
मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसी AI तकनीकों ने जटिल रासायनिक डेटा – जैसे स्पेक्ट्रोस्कोपिक परिणाम, अभिक्रिया पथ (reaction pathways) और आणविक संरचनाओं – को आसानी से समझने में मदद की है। इससे समय और संसाधनों की भारी बचत हो रही है, साथ ही नवाचार की गति कई गुना बढ़ गई है।
आज स्वचालित प्रयोगशालाएं (robotic labs), कंप्यूटर-आधारित मॉडलिंग और AI-संचालित सिमुलेशन रसायन विज्ञान के सबसे शक्तिशाली टूल्स बन चुके हैं। AI अब अणुओं के गुणों की भविष्यवाणी, नई दवाओं की डिजाइन और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों के विकास में सीधे योगदान दे रहा है।
2024 नोबेल पुरस्कार: AI को वैश्विक मान्यता
रसायन विज्ञान में AI की इस भूमिका को 2024 के नोबेल पुरस्कार से सर्वोच्च सम्मान मिला। यह पुरस्कार डेविड बेकर, डेमिस हैसाबिस और जॉन जम्पर को संयुक्त रूप से दिया गया।
- डेमिस हैसाबिस और जॉन जम्पर द्वारा विकसित AlphaFold AI सिस्टम ने प्रोटीन की 3D संरचनाओं की अत्यंत सटीक और तेज़ भविष्यवाणी संभव कर दी। यह औषधि विकास, जैव-रसायन और चिकित्सा अनुसंधान के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है।
- डेविड बेकर ने कंप्यूटर-आधारित तरीकों से पूरी तरह नए कृत्रिम प्रोटीन डिजाइन किए, जो प्रकृति में पहले कभी नहीं थे। ये भविष्य की दवाओं, एंजाइमों और सस्टेनेबल सामग्रियों के लिए क्रांतिकारी साबित होंगे।
यह पुरस्कार दर्शाता है कि AI अब सिर्फ टूल नहीं, बल्कि रसायन विज्ञान का अभिन्न अंग बन चुका है।
DEI आगरा में AI-आधारित रसायन विज्ञान को बढ़ावा
दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (DEI), आगरा के रसायन विज्ञान विभाग में छात्रों और शोधार्थियों को मजबूत अकादमिक आधार के साथ AI-उन्मुख अनुसंधान वातावरण प्रदान किया जा रहा है। विभाग नियमित रूप से सेमिनार, वर्कशॉप और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित करता है।
हाल ही में 10 जनवरी 2026 को DEI ने “Emerging Role of Artificial Intelligence in Chemistry Researches” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस सेमिनार में AI के रासायनिक अनुसंधान में बढ़ते प्रभाव पर गहन चर्चा हुई, जिसमें संगणकीय रसायन (computational chemistry), डेटा-ड्रिवन अध्ययन और उभरती AI तकनीकों पर फोकस रहा।
ऐसे कार्यक्रमों से छात्रों में अंतःविषय (interdisciplinary) दृष्टिकोण विकसित हो रहा है, जो उन्हें वैश्विक स्तर के रिसर्च के लिए तैयार कर रहा है।
भविष्य की ओर सशक्त कदम
आने वाले वर्षों में रसायन विज्ञान और AI का यह समन्वय अनुसंधान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा – चाहे वह कैंसर जैसी बीमारियों की नई दवाएं हों, क्लाइमेट चेंज से लड़ने वाली सामग्रियां हों, या सस्टेनेबल केमिस्ट्री का नया युग।
DEI का रसायन विज्ञान विभाग अपनी समृद्ध शैक्षणिक परंपरा, सक्रिय अनुसंधान संस्कृति और AI को अपनाने की तत्परता के बल पर इस परिवर्तनकारी युग में मजबूत योगदान देने के लिए तैयार है।
आगरा से निकल रही यह चिंगारी पूरे देश के युवा वैज्ञानिकों को प्रेरित कर रही है – AI के साथ रसायन विज्ञान का नया अध्याय लिखने के लिए!

