जिला नजर –वैश्विक पटल पर तनाव की लहरें उफान मार रही हैं, जबकि भारत में संसदीय गलियारों में राजनीतिक भूचाल आ गया है। पश्चिम एशिया का संघर्ष अब अमेरिका-ईरान युद्ध की आग में धधक रहा है, जिसका असर तेल कीमतों पर साफ दिख रहा है। इसी बीच, लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ने विपक्ष को एकजुट कर दिया है। ये घटनाएं न केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि घरेलू अर्थव्यवस्था और राजनीति को भी नई दिशा दे रही हैं। आइए, आज की प्रमुख सामयिक घटनाओं पर नजर डालें।
सबसे पहले, पश्चिम एशिया का संकट। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों में ‘सभी अमेरिकी बेस नष्ट’ हो चुके हैं। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद आया, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ युद्ध में ‘अधिक अमेरिकी हताहतों की संभावना’ जताई। ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया से भी अपील की कि वह ईरानी महिलाओं की रक्षा के लिए कदम उठाए। परिणामस्वरूप, वैश्विक तेल कीमतें 15% तक उछल गईं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ गई। मिस्र में तो ईंधन कीमतें 30% तक महंगी हो चुकी हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन को झकझोर रही है। इस संघर्ष ने न केवल मध्य पूर्व को अस्थिर किया है, बल्कि यूक्रेन-रूस युद्ध की यादें ताजा कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल युद्धविराम की मांग की है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही।
भारत पर इसका सीधा असर पड़ा है। पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र में तनाव के कारण एअर इंडिया ने 78 अतिरिक्त उड़ानें फिर से शुरू की हैं, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। महाराष्ट्र में एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरें आ रही हैं, जो तेल संकट का प्रारंभिक संकेत हैं।
वहीं, दिल्ली में बजट सत्र का दूसरा दिन विपक्ष के हंगामे से शुरू हुआ। भाजपा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 11 मार्च के लिए सांसदों को व्हिप जारी किया है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही को पक्षपाती ढंग से चला रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे ‘राजनीतिक साजिश’ बता रहा है।
यह प्रस्ताव संसद की गरिमा पर सवाल खड़ा कर रहा है, खासकर जब देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा में स्थानीय समाचारों में मौसम और विकास परियोजनाओं का जिक्र है, लेकिन राष्ट्रीय फोकस संघर्ष और संसदीय संकट पर केंद्रित है।
अन्य वैश्विक मोर्चों पर, न्यूयॉर्क में दो किशोरों की गिरफ्तारी बम विस्फोट की कोशिश के आरोप में हुई, जो आतंकी खतरे को रेखांकित करती है। अमेरिका में तीन भाइयों को सेक्स ट्रैफिकिंग के दोषी ठहराया गया, जो लक्जरी रियल एस्टेट ब्रोकर्स थे। चीन-उत्तर कोरिया संबंधों में गतिविधियां बढ़ी हैं, जबकि कोविड-19 का प्रभाव सार्वजनिक परिवहन पर अभी भी बरकरार है।
ये घटनाएं हमें सतर्क करती हैं कि वैश्विक शांति कितनी नाजुक है। भारत को न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करनी होगी, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की रक्षा भी। तेल संकट से अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा, लेकिन मजबूत कूटनीति से ही राह निकलेगी। आज का घटनाचक्र हमें याद दिलाता है—शांति ही प्रगति की कुंजी है।























