फतेहाबाद/आगरा: यह ज्ञापन बढ़ती कृषि लागत, आवारा पशुओं के प्रकोप, फसल सुरक्षा की कमी और कृषि उत्पादों के घटते मूल्य के कारण किसानों में पनप रहे असंतोष के समाधान की मांग करता है।
किसान नेताओं ने बताया कि प्रदेश के किसान फसल के सही मूल्य, बिजली-पानी की सुविधाओं, बीमा मुआवजे और कृषि इनपुट की बढ़ती कीमतों जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया गया, तो कृषि एक घाटे का व्यवसाय बन जाएगी।
मांगपत्र में कई प्रमुख बिंदु शामिल हैं। इनमें कोल्ड स्टोरेज के किराए पर नियंत्रण की मांग की गई है, जिससे आलू उत्पादक किसानों का शोषण रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, छोटे और सीमांत किसानों के सभी कृषि ऋण माफ करने की भी मांग की गई है।एक अन्य महत्वपूर्ण मांग ग्रामीण क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर व्यवस्था को समाप्त कर किसानों को रियायती या मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है। किसानों ने प्रत्येक गांव में प्रभावी गो-आश्रय स्थलों के संचालन की भी मांग की, ताकि फसलों को आवारा पशुओं से बचाया जा सके। भाकियू ने फसल बीमा योजना में पारदर्शिता लाने और किसानों को त्वरित एवं वास्तविक मुआवजा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही, बीज, खाद, डीजल और कीटनाशकों पर लगने वाले करों में कमी करके किसानों की लागत घटाने की मांग की गई है।
जिला प्रवक्ता नत्थूसिंह धाकरे और तहसील अध्यक्ष कृष्ण कांत शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो भारतीय किसान यूनियन एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये मांगें केवल किसानों की मजबूरी नहीं, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के भविष्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा हैं।





