आगरा: जिले के जगदीशपुरा थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 28 वर्षीय महिला ने अपने दिल्ली निवासी पति, देवर और ससुराल पक्ष पर दांपत्य संबंध न बनाने (नपुंसकता का आरोप), मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न, दहेज हड़पने और देवर द्वारा अश्लील हरकतों के गंभीर आरोप लगाए हैं। यह घटना फरवरी 2026 में रिपोर्ट हुई है और दैनिक भास्कर सहित कई स्थानीय मीडिया में प्रमुखता से कवर की गई है।
घटना का पूरा विवरण
- शादी की तारीख: 29 अप्रैल 2025 को दिल्ली निवासी युवक से शादी हुई।
- 9 महीने बाद भी कोई शारीरिक संबंध नहीं: महिला के अनुसार, शादी के बाद पति ने कभी भी दांपत्य संबंध नहीं बनाए। हर बार तबीयत खराब होने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता था।
- हनीमून पर भी बहाना: शादी के कुछ दिनों बाद मनाली हनीमून गया, लेकिन वहां भी पति ने संबंध बनाने से इनकार कर दिया। डॉक्टर दिखाने की बात पर चिल्लाया और इनकार किया।
- सास-ससुर का रवैया: महिला ने सास-ससुर को बताया, लेकिन उन्होंने कहा – “हमें पता है बेटा संबंध नहीं बना सकता। हमारा छोटा बेटा (देवर) अविवाहित है, उसी से वंश आगे बढ़ेगा।”
- देवर की अश्लील हरकतें: एक दिन देवर गलत नीयत से कमरे में आया और अश्लील हरकतें कीं। विरोध पर पति और ससुराल वालों ने देवर का पक्ष लिया और महिला पर दबाव डाला कि विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
- घर से निकाला जाना: विरोध करने पर महिला को घर से निकाल दिया गया। वह मायके आ गई और पुलिस के पास पहुंची।
- दहेज और जेवर का आरोप: शादी में परिवार ने करीब 50 लाख रुपये खर्च किए (25 लाख नकद + सोने-चांदी के आभूषण + घरेलू सामान)। शादी के एक सप्ताह में साजिश से जेवर ले लिए गए। जब वापस मांगे तो टालमटोल किया। 2 जनवरी 2026 को बैंक से मैसेज आया कि लॉकर संचालित किया गया, जबकि महिला मौजूद नहीं थी। आरोप है कि पति ने जेवर अपने कब्जे में रखे हैं।
पुलिस की कार्रवाई
महिला ने जगदीशपुरा थाने में पति, देवर और ससुराल पक्ष के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया है। संभावित धाराएं: IPC 498A (पति/रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता), दहेज निषेध अधिनियम, और अन्य संबंधित धाराएं (जैसे छेड़छाड़, धमकी आदि)।
मामले के संवेदनशील पहलू
यह मामला न केवल दहेज उत्पीड़न का है, बल्कि नपुंसकता के आरोप, देवर द्वारा यौन उत्पीड़न और ससुराल द्वारा वंश आगे बढ़ाने के लिए दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। ऐसे मामले समाज में महिलाओं की सुरक्षा, दांपत्य अधिकार और दहेज प्रथा पर सवाल उठाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दांपत्य संबंध न बन पाना (impotence) वैवाहिक आधार पर तलाक का वैध आधार हो सकता है (हिंदू मैरिज एक्ट के तहत), लेकिन इसमें उत्पीड़न और दहेज जुड़ने से मामला आपराधिक हो जाता है।























