रिपोर्ट- आकाश पंडित
आगरा: ग्रामीण पत्रकारिता के अग्रदूत और ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन (ग्रापए) के संस्थापक स्व. बाबू बालेश्वर लाल जी की 95वीं जयंती पर आज गुरुवार को आगरा जिला कार्यालय पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। बलिया की क्रांति भूमि पर जन्मे इस महान व्यक्तित्व ने ग्रामीण क्षेत्रों की अनकही कहानियों को मुख्यधारा के मीडिया तक पहुंचाने का अभूतपूर्व कार्य किया, जिससे छोटे-छोटे गांवों और कस्बों के पत्रकारों को नई पहचान मिली।

संगठन की स्थापना से ग्रामीण पत्रकारिता को नई ऊंचाइयां

1980 में उत्तर प्रदेश में ग्रापए की स्थापना करने वाले बाबू बालेश्वर लाल जी ने न केवल ग्रामीण पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष किया, बल्कि एक मजबूत संगठन का निर्माण भी किया जो आज प्रदेश का सबसे बड़ा आंचलिक पत्रकार मंच है। उनकी दूरदृष्टि ने ग्रामीण पत्रकारिता को गौरव प्रदान किया और छोटे पत्रकारों को मंच देकर उनकी आवाज को अखबारों के पहले पृष्ठ तक पहुंचाया। समाज और मीडिया जगत में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है, जो प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

आगरा इकाई के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिला कार्यालय पर आयोजित समारोह में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू जी का जीवन आदर्श और संघर्ष की मिसाल है। “उनके बताए मार्ग पर चलते हुए हम पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहेंगे,” ग्रापए आगरा इकाई के अध्यक्ष ने भावुक स्वर में कहा। समारोह में वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया।

देशभर में स्मरण: एक विरासत की जयंती

इस बीच, पूरे देश में ग्रापए की विभिन्न इकाइयों ने बाबू जी की जयंती मनाई। ललितपुर, मिर्जापुर और गोरखपुर जैसे जिलों में विचार गोष्ठियां और स्मृति सभाएं आयोजित हुईं, जहां उनके योगदान पर चर्चा हुई। संगठन ने संकल्प लिया कि ग्रामीण पत्रकारिता को मजबूत बनाने के लिए उनके सिद्धांतों को अमल में लाया जाएगा।

बाबू बालेश्वर लाल जी की पुण्यतिथि हर साल 27 मई को मनाई जाती है, लेकिन उनकी जन्म जयंती पर यह समारोह विशेष महत्व रखता है। आगरा के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनकी विरासत अमर है।

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